भारत में नब्बे प्रतिशत सरकारी कर्मचारी नौकरी से निकाल दिये जायेंगे
भारत में नब्बे प्रतिशत सरकारी कर्मचारी नौकरी से निकाल दिये जायेंगे, हैरान न हों. बात सही है. किसी भी सरकार की सेवा नियमावली को उठाकर देख लीजिये और फिर सरकारी सेवकों के कामकाज की उनसे तुलना कर लीजिये, खुद-ब-खुद पता चल जायेगा. कुछ चीजें तो प्रक्टीकल नहीं हैं, जिन्हें इनमें से हटाना चाहिये. दूसरी तरफ अपने कर्तव्यों का निर्वहन न करना किसी भी सरकारी कर्मचारी के लिये "अनबीकमिंग आफ गवर्नमेन्ट सर्वेन्ट" होता है. एक अफसर पुत्र हाल तक अपने पप्पा की बत्ती लगी सरकारी गाड़ी में स्कूल/कोचिंग जाता रहा, अब वह भी अफसर बन गया है. हाल क्या होगा, भगवान (सिकुलर क्षमा करें) ही मालिक है. एक सज्जन एक प्रमुख संस्था के मुखिया क्या बने उनकी पत्नी जो एक स्कूल में अध्यापिका हैं, को बड़ी दिक्कत हो गयी है. उन्हें भी बत्ती लगी सरकारी गाड़ी में चलना पड़ता है. गाड़ी अब उन्हें छोड़ने व लेने जाती है. बेटे को मजबूरी में गाड़ी में एसी चलाकर बैठना रहता है जब तक मम्मा नहीं आती. बेचारे.
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