क्या हमारी तरह का धर्म-निरपेक्ष होना वास्तव में उचित है?

हम सब लोगों को धर्म-निरपेक्षता का पाठ पढाया जाता है और यह सिखाया जाता है कि धर्म-निरपेक्षता की अवधारणा सबसे अच्छी अवधारणा हैलेकिन हमारी तरह का धर्म-निरपेक्ष होना क्या वास्तव में उचित है? जो धर्म-निरपेक्षता हमें सिखाई पढ़ाई जा रही है, वह ठीक है? किस तरह का धर्म-निरपेक्ष आचरण होना चाहिए हमारा? मैं आप लोगों से निवेदन करता हूँ कि आप अपने विचार रखने की कृपा करेंमेरे हिसाब से धर्म से निरपेक्ष होना ही हमें सही राह से भटका देता हैसैनिक का धर्म है देश के लिए लड़ना, अध्यापक का धर्म है शिक्षा देना, तो विद्यार्थी का शिक्षा ग्रहण करना हैधर्म और अंध-धर्म के बीच का जो फर्क है उसे हम लोग नहीं देख पायेएक संप्रदाय के लिए धर्म-निरपेक्षता का मायना और है दूसरे के लिए औरकई चीजें हैं, कई नजरिये हैं। देश को धर्म-निरपेक्ष बनाते बनाते कब प्रो-मुस्लिम हो गए, पता ही नहीं चला और यह स्वयं मुस्लिमों के लिए, उनके समग्र हितों के लिए कहीं अधिक नुकसान दायक है। जिसका अहसास संभवत: आने वाले समय में हो जाएगा। अधिक कुछ न लिखकर आपके विचार जानना चाहूँगा। अभी चौदह दिसंबर तक काफी व्यस्त हूँ जिसके कारण टिप्पण्या नहीं पा रहा हूँ तथा जिसके लिए क्षमा प्रार्थी भी हूँ।

Comments

Popular posts from this blog

एक सलाह मजबूरी पर...

कुछ पुरानी यादें