मुस्लिम ब्लॉगर का कसाब प्रेम

अभी अभी अजीज बरनी नाम के सज्जन के ब्लॉग की दो प्रविष्टियाँ पढ़ींएक का नाम है "कसाब की जबान हेडली का नाम, सवाल बहुत बड़ा है" और दूसरी है "२६/११ को मुंबई पुलिस का किरदार एक और सवाल"। दोनों ही पोस्टों में किस कदर एक तरफा रवैया अपनाकर यह सिद्ध करने की कोशिश की जा रही है जैसे कि कसाब एक संत पुरुष था और उसके लिए फंसाया गया हैदूसरी तरफ यह भी सिद्ध किया जा रहा है कि करकरे और काम्टे की हत्या किसी षड्यंत्र के चलते पुलिस वालों ने ही करा दीउनकी दोनों प्रविष्टियों का निचोड़ यही हैअधिकाँश मुस्लिम ब्लॉगर किस हद तक सांप्रदायिक सोच रखते हैं, उसका एक नमूना भर आप इन प्रविष्टियों में देख सकते हैं (और हाँ, श्री महफूज अली जैसे अच्छी सोच वाले व्यक्ति इस श्रेणी में शामिल नहीं हैं) । बात फिर वही आती है कि हिन्दू अपने जेन्युइन हितों की बात करे तो सांप्रदायिक लेकिन मुस्लिम घोर साम्प्रदायिकता फैलाये तो भी धर्म-निरपेक्ष

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