लखनऊ में इन्साफ हो भी गया

लीजिये साहब, लखनऊ में इन्साफ हो भी गया. थप्प्पड़ खाने वाला कर्मचारी जेल भेजा गया और उसके बाद उसे निलम्बित कर दिया गया. भारत में यही इन्साफ है. शोक और दुख है मुझे कानून के इस मखौल पर. इससे भले तो अंग्रेज ही थे, कम से कम बाहर से तो आये थे. धिक्कार है कानून का मजाक उडाने वाले लोकतन्त्र के इन पहरुओं पर. कम से कम इस घटना पर तो मानवाधिकार आयोग को स्वत: संज्ञान लेना चाहिये और उच्च न्यायालय को भी. वरना वह दिन दूर नहीं कि गृह युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी इस देश में यदि इसी प्रकार से संविधान की खिल्ली उड़ाई जाती रही.

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