कश्मीरी आतंकियों का पुनर्वास होगा
अभी कुछ देर पहले खबरों में चर्चा चल रही थी जिसमें कश्मीर के मुख्यमन्त्री उमर अबदुल्ला के उस बयान का जिक्र था जिसमें दिग्भ्रमित कश्मीरी युवाओं के पुनर्वास और वापसी का प्रस्ताव उन्होंने दिया था. कितना अच्छा लगता है सुनने में. लाखों कश्मीरी पंडित अपने ही देश में कश्मीरी आतंकवादियों का शिकार होकर विस्थापित हो देश के विभिन्न भागों में ठोकर खा रहे हैं. उनके पुनर्वास के लिये न तो कश्मीरी सरकार के पास कोई योजना है और न ही इस मुद्दे पर कोई धर्मनिरपेक्ष नेता बात करना चाहता है. लेकिन दिग्भ्रमित कश्मीरी युवाओं के लिये उनके पास पर्याप्त समय है. जब यही सब करना है तो फिर क्या जरूरत है कश्मीर में सेना के जवानों की बलि चढ़ाने की. क्या आवश्यकता है सीमा पर सेना तैनात करने की और भी तमाम तरह की नौटंकी करने की. बंग्लादेशियों को भारत का नागरिक बना ही लिया गया है, जो आतंकवादी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. जब दुर्दान्त आतंकवादियों के बारे में ऐसी सोच है और जब उन्हें माफ करने की तैयारी चल रही हो तो कम से कम उन सभी कैदियों को रिहा कर देना चाहिये जो भारत की जेलों में सड़ रहे हैं और उन तमाम ट्रायल्स को बन्द करना चाहिये जो हत्या इत्यादि तक के अपराधों के मामले में चल रहे हैं. और भी बेहतर हो यदि लादेन को भारत के अगले प्रमुख के रूप में प्रोजेक्ट किया जाये.
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