रिलायन्स और बीएसएनएल द्वारा अपने उपभोक्ता को किया गया परेशान

पिछली पोस्ट में मैंने एअरटेल के कस्टमर केयर के बारे में लिखा था. अब आपको बताता हूं रिलायन्स और बीएनएनएल के बारे में.

दिसम्बर के अंत में मैंने अपने रिलायन्स प्रीपेड में संदेश वाला एक कूपन डलवाया. उद्देश्य था कि बीएसएनएल जब काम न करे तो बात करने और संदेशे भेजने के लिये रिलायन्स का कनेक्शन काम आयेगा. काफी कुछ सुन रखा था रिलायन्स के बारे में. हमने भी उन्तीस तारीख से धड़ाधड़ संदेश भेजना प्रारम्भ किया जिसमें कुछ काफी महत्वपूर्ण थे. मोबाइल फोन की संदेश सेवा में डिलीवरी रिपोर्ट आफ कर दी थी, क्योंकि संदेश डिलीवर होने के बाद जब उसका पुष्टिकरण आता तो थोड़ी झुंझलाहट होती. अब हुआ यह कि पन्द्रह जनवरी तक हम इस मुगालते में कि सारे संदेश पहुंच गये होंगे. भला हो हमारे मित्र का, जिन्होंने हमें यह बताया कि मेरा संदेश उन तक नहीं पहुंचा. फिर एक अन्य सज्जन ने भी चेक किया तो पाया कि उनके संदेश भी डिलीवर नहीं हुए थे. यह दिक्कत बीएसएनएल पर भेजने वाले संदेशों को लेकर थी. अब इस डिलीवरी की पीड़ा से भन्नाकर जब हमने काल सेंटर बात करने की कोशिश की तो लगभग पन्द्रह मिनट बाद एक पुरुष स्वर सुनाई पड़ा. अपनी समस्या के बारे में बताया तो उन सज्जन ने समझाया कि सर प्राब्लम तो है, लेकिन जल्दी ही साल्व हो जायेगी. फिर दस-दस दिनों के बाद मिलाया, हालत वही थी. काल सेंटर का कर्मचारी यह समझाने की कोशिश करता कि यह प्राब्लम बीएसएनएल की तरफ से है, उनके सर्वर की दिक्कत है. मैंने उससे यह कहा कि आप लोग सैकड़ों एसएमएस और काल विज्ञापन की करते रहते हैं, यदि कनेक्टिविटी की समस्या थी तो ग्राहकों को क्यों नहीं बताया, जिसका कोई जबाव उसके पास नहीं था. फिर तीसरी बार फोन करने पर एक ने अपने सुपरवाइजर से बात कराने से ही इनकार कर दिया. चौथी बार फिर मिलाया तो बात तो हुई, लेकिन समस्या वहीं के वहीं. अपनी गलती भी मानने से इनकार. यह भी स्वीकार नहीं कर रहे कि जो संदेश मैंने भेजे और जो डिलीवर नहीं हुये उससे मुझे कोई तकलीफ हुई. एक ई-मेल भी किया तो उसका रूटीन जबाव आ गया. अभी चार दिन पहले एक मैसेज फ्लैश हुआ कि ICMD या ऐसी ही कुछ और सर्विस एक्टीवेट कर दी गयी और जिसके लिये इतने रुपये लगेंगे. ईश्वर की कृपा से मात्र बीस मिनट में ही काल सेंटर पर बात हो गयी और वह सर्विस डी-एक्टीवेट हो गयी. लेकिन अपने आप कैसे एक्टीवेट हुई, इसका जबाव था कि कभी कभी खुद भी हो जाती है.

अगला किस्सा मेरे एक मित्र के साथ BSNL का. श्रीमान जी ने पचास रुपये का एक SMS वाउचर अपने मोबाइल में डलवाया, जिससे शायद तीन-चार सौ SMS मिलते थे. उसके बाद में फिर उन्होंने उनचास पैसे प्रति मिनट काल के टैरिफ वाउचर का प्रयोग किया जिससे कि काल रेट कम हो सकें. नतीजा यह निकला कि अब हर SMS के भी उनचास पैसे कटने लगे. फिर BSNL की वेबसाईट पर जाकर देखा जहां यह लिखा था कि दोनों वाउचर साथ काम करेंगे. स्थानीय स्तर पर सम्पर्क करने से कोई काम नहीं बना. फिर स्थानीय महाप्रबंधक के पास ई-मेल किया, नतीजा सिफर. सर्किल के नोडल अफसर को ई-मेल किया, मेल बैरंग वापस आ गई. दिल्ली में ग्रीवांस के मुखिया को भी मेल की, कोई प्रतिउत्तर नहीं मिला. फिर सीएमडी को मेल भेजी गयी, उसका उत्तर मिला. मेल से भी और फिर स्थानीय कार्यालय से एक चिट्ठी भी आई. उन्हें एक दिन एसडीओ का फोन भी आया. बोले समस्या तो है, बेवसाईट पर लिखा है, लेकिन टैरिफ वाउचर के बाद तो उनचास पैसे ही कटते हैं, लेकिन आप का ठीक करा दिया है. नतीजा यह हुआ कि कुछ दिनों के लिये दस पैसे प्रति SMS कटने लगे.

हालात यह हैं कि अधिक से अधिक ग्राहक बटोरने के चक्कर में सिम फ्री में बांटे जा रहे हैं. मुफ्त टाकटाइम दिया जा रहा है और बाद में दूसरे तरीकों से वसूल किया जा रहा है. सुविधायें शून्य के बराबर हैं. नेटवर्क बिजी रहने लगता है, क्रास कनेक्शन हो जाते हैं. जब आपको सबसे अधिक आवश्यकता होती है उस समय आप अपने मोबाइल से नम्बर मिलाते हैं और आपको नेटवर्क बिजी रहने की आवाज सुनाई देती है. आप बैठे होते हैं, किसी काम में व्यस्त होते है या फिर कहीं जा रहे होते हैं और आपके मोबाइल पर एक नम्बर फ्लैश होता है, आप उठाते हैं तो आवाज आती है कि फलां कालर ट्यून के लिये दबायें एक.... हमारे जैसे देशों को छोड़कर यह हालात कहीं अन्य देशों में होते तो इन कम्पनियों पर जुर्माना भी ठुंकता और हो सकता है कि इनका लाइसेंस भी निरस्त हो जाता. लेकिन मेरे भारत की सरकारें और उन्हें चलाने वाले महान.

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