नक्सलियों ने फिर बीस जवानों को शहीद कर दिया.

 नक्सलियों ने फिर बीस जवानों को शहीद कर दिया. रोज की घटना बन गयी. हथियार कहां से आते हैं. सीमा पार से. सीमा पर तैनात कौन. हमारे जवान. अन्दर से सप्लाई होता है गोला-बारूद. चेकिंग और सुरक्षा किस के हाथ. हमारे ही जवानों के हाथ. भ्रष्टाचार का राक्षस पूरे देश को जकड़ चुका है. नीतियां कौन बनाता है. जन प्रतिनिधि. आम की चिन्ता क्यों करें? आम को समझा दिया कि चुसना तेरा जन्मसिद्ध कर्तव्य और चूसना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार. जनता को दो युवराज की जादू की झप्पी, दलित के झोंपड़े में बिताया एक घण्टा और हल्के परात में एक मुट्ठी मिट्टी उठाकर श्रमदान करने का बढ़िया चित्र. पढ़ने दिया नहीं. पढ़े नहीं तो समझ कैसे आये. समझ नहीं तो बाहर से अपने फायदे की समझदारी इंजेक्ट की. जो पढ़ गये वे जातिवाद फैलाने में पारंगत हो गये. रहने को घर नहीं, खाने को अन्न नहीं, पहनने को कपड़ा नहीं, फिर भी सारा जहां हमारा. उद्विग्न हूं. क्या लिखूं, शब्द भी नहीं मिल रहे. उन मारे गये जवानों के परिवारी जनों के बारे में सोच रहा हूं जिन्होंने अपना बाप-भाई-बेटा खोया होगा. जिस सुबह के इन्तजार में सब बैठे हैं, वह सुबह कभी नहीं आयेगी. कभी नहीं.

Comments

Popular posts from this blog

एक सलाह मजबूरी पर...

कुछ पुरानी यादें