कस्टमर केयर पर बात करने के लग रहे हैं पैसे - पेश है एक सुपर माइक्रो पोस्ट.
विश्वास नहीं होता, मुझे भी नहीं हुआ था. आखिर कस्टमर केयर क्यों बनाया जाता है, इसलिये कि कस्टमर को कोई समस्या हो तो केयर पर बात कर समस्या का निदान करा सके या शिकायत दर्ज करा दे या फिर कोई सुझाव इत्यादि दे सके. अभी पिछले दिनों जब मैंने एक कठिनाई के सिलसिले में एअरटेल के कस्टमर केयर से इंटरनेट सेटिंग्स के बारे में बात करना चाहा तो एक कनकलता, गजगामिनी टाइप महिला की आवाज आई "ध्यान दें कि उपभोक्ता से इस नम्बर पर काल करने के लिये प्रति तीन मिनट पचास पैसे चार्ज किये जायेंगे". पहले मुझे लगा कि शायद मैंने कोई और नम्बर मिला दिया है या फिर शायद कोई वैल्यू एडेड योजना पर चला गया हूं, इसलिये फिर दोबारा और फिर तिबारा नम्बर डायल किया. लेकिन मैं गलत था, वास्तव में कस्टमर केयर पर पचास पैसे चार्ज किये जा रहे थे. कितना अच्छा किया कम्पनी ने. एक पंथ और तीन काज. पहला कि लोग काल कम करेंगे इसलिये उन्हें काल सेंटर पर कम लोग रखना पड़ेंगे. दूसरा काल करेंगे तो पैसे सीधे होंगे. तीसरा शिकायतें अपने आप कम हो जायेंगी. और मेरे एक मित्र के अनुसार भारत में तो वैसे भी कस्टमर का अर्थ होता है वह व्यक्ति जो कष्ट से मरने योग्य हो, लिहाजा किसी के शिकवा-शिकायत करने का आधार नहीं बनता. तो अगली बार जरा संभल कर कस्टमर केयर पर सम्पर्क कीजियेगा.
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