पुणे बम-ब्लास्ट के सिलसिले में एक तथ्यपरक रिपोर्ट.
हिन्दुस्तान के बीस फरवरी के अंक में श्री पंकज चतुर्वेदी का एक लेख छपा है जिसके कुछ हिस्से यहां दिये जा रहे हैं. पूरा लेख आप हिन्दुस्तान में पढ़ सकते हैं. यह एक बहुत ही रोचक तथा तथ्यों से परिपूर्ण लेख है, लेख को पढ़ने से आपको ऐसे तथ्य पढ़ने को मिलेंगे जो अभी तक सामने नहीं आ सके हैं. "मीडिया ने जल्दबाजी में हादसे के कारणों की तह में गये बगैर किसी वर्ग या देश विशेष को इसके लिये जिम्मेदार मान लिया जाये. यह भी नहीं पता चल सका है कि धमाके में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक कौन सा था. यह तय नहीं हो पाया था कि धमाके में आरडीएक़ का इस्तेमाल किया गया कि अमोनियम नाइट्रेट का, लेकिन यह स्थापित करने का प्रयास होता रहा कि धमाका करने वालों का प्रशिक्षण पाकिस्तान में हुआ था. यह भुला दिया गया कि एक कर्नल ने सेना के जब्ती वाले भंडार से आरडीएक्स चुराया था. मालेगांव, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और अजमेर शरीफ दरगाह में हुए धमाकों में भी इसी तरह की तकनीक थी." "दो साल पहले ही कानपुर में एक घर में बम फटने से दो युवकों की मौत के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि मृतक बजरंग दल से जुड़े थे. फिर जर्मन बेकरी में धमाके के कुछ मिनट बाद ही ऐसी कौन सी सूचना मिल गई कि पाकिस्तान और मुसलमान को कटघरे में खड़ा कर दिया?""आतंकवादी वारदात में जितने लोगों की जान गई है अपने यहां उससे तीन गुना लोगों की जान जक्सलवादी आतंकवाद की घटनाओं में गई है.""दोनों तरफ के उग्रपंथी तत्व ऐसी वार्ताओं का हमेशा ही विरोध करते रहे हैं. एक आशंका यह भी है कि पुणे विस्फोट के पीछे भी ऐसा ही मकसद था."
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