कमांडेंट बिरदी का क्या दोष था जो उन्हें गिरफ्तार किया गया

कमांडेंट बिरदी का क्या दोष था जो उन्हें गिरफ्तार किया गया. क्या यह उनका दोष था कि उन्होंने दंगाईयों की भीड़ पर, जो कि दंगा कर रही थी, पर आंसू गैस छोड़ने और फायरिंग करने का आदेश दे दिया और जिसमें एक लड़के की मौत हो गयी. इन परिस्थितियों में कल कोई भी अधिकारी गोली चलाने के आदेश अतिविषम परिस्थितियों में भी नहीं देगा. और जब दंगाईयों को किसी भी प्रकार का डर रहेगा ही नहीं तो फिर उन्हें नंगा नाच करने से कौन रोक सकता है. जब पूरे देश में लाखों लोग पुलिस कस्टडी में मार दिए जाते हैं तो सरकारों को कुछ भी कष्ट नहीं होता और पुलिसवाले अपनी पूरी सेवा कर आराम से रिटायर हो जाते हैं, लेकिन यदि एक दंगाई मारा जाता है तो हंगामा बरप जाता है, क्योंकि मरने वाला हिन्दू नहीं था. जैसे कि रजनीश के मामले में हुआ. चूंकि उसने एक मुस्लिम लड़की से शादी कर ली थी जो कि उस लड़की के धर्मनिरपेक्ष परिवार वालों को हजम नहीं हुआ लिहाजा पुलिस से मिलकर रजनीश को मार दिया गया. जैसा कि आमतौर पर होता है कि ऐसे मामलों में सभी धर्म-निरपेक्षी और मानववादी चुपचाप बैठ जाते हैं, इसमें भी चुप्पी मार कर बैठ गये.  जम्मू-कश्मीर में जिस प्रकार से फैसले लिये जा रहे हैं उससे तो यह लगता है जैसे कि जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा ही नहीं है. अभी कल ही विधानसभा में एक बिल पेश किया गया जिसमें यह प्रावधान है कि वहां की महिला के प्रदेश के बाहर शादी करने पर उसकी नागरिकता खत्म हो जायेगी. अब नागरिकता तो किसी स्वतन्त्र देश की ही होती है, प्रदेश या जिले की नहीं. वहां का तो मूल निवास होता है. पहले भी बाकी देश के लोग जम्मू-कश्मीर में एक इंच जमीन नहीं खरीद सकते थे, अब यह नया तरीका (विशेषत: हिन्दुओं के लिये यह बहुत खतरनाक है). कश्मीर वैली के लिये अरबों रुपये केन्द्र सरकार खर्च करती है, वहां की सुरक्षा पर हजारों सैनिक जान से हाथ धोते हैं, लेकिन वहां के नेता क्या कर रहे हैं, सबको दिखाई दे रहा है. प्रस्तुत बिल का भी विरोध भाजपा और पैंथर्स पार्टी ने किया है. बाकी सभी बिल के समर्थन में हैं. मेरा आह्वान है महिलाओं से कि वे अपने अपने ब्लाग के माध्यम से इस बिल के बारे में प्रचार करें और कमांडेंट बिरदी के समर्थन में मुहिम चलायें.

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