नृशंसता की हद
इस चित्र में एक श्रीलंकाई सैनिक एक तमिल गुरिल्ला (?) को गोली मार रहा है...पिछले वर्ष जनवरी, २००९ की तस्वीर है..क्या ये उचित तरीका माना जा सकता है विद्रोहियों पर काबू पाने का?? यदि ये उचित नहीं तो फिर भारत सरकार ने चुप्पी क्यों साधी और यदि ये उचित है तो आतंकवादियों/नक्सलियों/उल्फा विद्रोहियों इत्यादि के साथ यही तरीका क्यों नहीं अपनाया जाता...
वैसे शायद मनुष्य आज से पांच-दस हजार वर्ष पहले कहीं अधिक संस्कारी और सभ्य (सिविलाइज्ड) था जब राज्य जैसी संस्था का नामो-निशान नहीं था. आदमी के पास देश, राज्य और निजी संपत्ति जैसी चीजें नहीं थीं. हिंसा भी नहीं थी और यदि थी भी तो जीवन-यापन हेतु या फिर अस्तित्व की रक्षा हेतु....
ऐसी मानवीय सभ्यता से तो हिमयुग अधिक अच्छा..
नहीं क्या ????

Comments
Post a Comment