"हिन्दू" आतंकवाद एक गंभीर समस्या

चिदम्बरम जी,  मत कहिये कि "हिन्दू" आतंकवाद एक गंभीर समस्या है... देश में सौ करोड़ से कुछ ही कम हिन्दू होंगे और अभी तक तथाकथित "हिन्दू" आतंकवादी सौ भी नहीं पकड़े गये हैं. आपने एक कहानी तो पढ़ी ही होगी. वही भेड़िया आया, भेड़िया आया और फिर एक दिन भेड़िया आ गया सच्च में. कश्मीर में हिन्दू साफ हो गये, कोई परेशानी नहीं. मुस्लिम बाहुल्य अन्य इलाकों से हिन्दू धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं. आप ही की सरकार के रहते सीआरपीएफ ने एक रिपोर्ट पेश की है जिसमें असोम में आपरेट करते चौदह इस्लामी आतंकवादी संगठनों के बारे में बताया गया है कि वे किस प्रकार हर व्यक्ति से वसूली कर रहे हैं. हिन्दू को पहले ही दोयम दर्जे का नागरिक बनाया जा चुका है और पहला हक अल्पसंख्यकों का मनजी भी सुनिश्चित कर चुके हैं. संख्या में देखा जाये तो हिन्दू नवयुवक ही बेरोजगारी में, भुखमरी में पहला स्थान पायेंगे. और आतंकवादी घटनाओं में जान गंवाने में भी हिन्दू ही पहले स्थान को घेरे बैठे होंगे.  जान-माल के नुकसान की भी गणना करा लीजियेगा, वहां भी पहला स्थान हिन्दू को ही मिलेगा. क्षमा कीजियेगा आप जैसे नेताओं और देश की रक्षा करने में भी हिन्दू ही पहले स्थान पर काबिज होंगे. इस सबके बाद भी आम हिन्दू आतंकवाद का नैतिक समर्थन करने के बारे में सपने में भी  सोच तक नहीं सकता. कश्मीर में कट्टर आतंकवादियों के लिये भटका मानकर पुनर्वास पैकेज लाने की बात चलती है तो दूसरी तरफ "हिन्दू" आतंकवाद की रट लगाकर किसे प्रसन्न करने का उपक्रम किया जा रहा है, कोई बहुत ढ़ंकी-छुपी बात नहीं है. कितने बड़े आर्थिक घोटाले देश में हो रहे हैं जिनमें म न्त्रियों तक का नाम आ रहा है और ऐसा लगता है कि इस सब को दबाने के लिये और मुद्दे खड़े किये जा रहे हैं. अभी तक आई पी एल के पीछे इन्कम टैक्स, ईडी और तमाम एजेन्सियां रोज नया बयान दे रही थीं, अब सब गायब हो गयीं. कहीं न कहीं तो कुछ दाल में काला है ही. ऐसा न हो कि इसी तरह के पुनर्वास पैकेज  नौजवानों के लिये "भटकने" और फिर "मुख्यधारा में वापसी" के लिये प्रेरित कर दें. शायद वह समय देश के लिये बड़ा ही दुर्भाग्यपूर्ण होगा. इसलिये निवेदन है कि वास्तव में सही मायनों में धर्मनिरपेक्ष बनें और भेड़िया आया-भेड़िया आया से बचें. देश आपका शुक्रगुजार होगा.

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