आज फिर शहीद बना दिये गये पचास जनसामान्य और पुलिस वाले
एक बार फिर दंतेबाड़ा में पचास सामान्य लोगों और पुलिसकर्मियों को शहीद बना दिया गया. हम लोग उन शहीद पुलिस कर्मियों के परिवारीजनों के गम को बांट तो नहीं सकते, लेकिन उन परिवारों के प्रति आभार तो व्यक्त कर ही सकते हैं, जिनके प्रियजनों ने हमारे ही अन्य भाइयों की प्राणरक्षा में शहादत प्राप्त की....
निकम्मे राजनेता, भ्रष्ट अफसर और इन सब से उत्पन्न गरीबी, बेरोजगारी, भूख, अन्याय ने कहीं न कहीं गरीबों को इन दुर्दांत हत्यारों का मोहरा बनने को विवश कर दिया है. देश के नेता और नीतियों तथा जनता के संवेदनहीन मालिकों (अफसरों) और खून चूसने वाले उद्योगपतियों ने देश को चौपट करके रख दिया है....
अभी भी वक्त है सुधरने का. न्यूटन का नियम अभी भी सत्य है जिसके अनुपालन में गंगा अभी भी ऊपर से नीचे की तरफ ही बहती है. वही लड़का जो भ्रष्टाचार के विरोध में हर समय तैयार खड़ा रहता है, अफसर या नेता बनते ही उसकी आंखें मुंद जाती हैं. शिक्षित इसलिये नहीं किया कि लोग शिक्षित हो जायेंगे तो भला-बुरा सोचने लगेंगे. वोट किसे प्यारे नहीं....
सब जागो अब वरना पछताने का समय भी नहीं मिलेगा.
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