महाराष्ट्र के सांगली जिले के मिरज में हुये दंगों के पीछे राष्ट्रवादी कांग्रेस के मेयर मैनुद्दीन का हाथ-बकौल कृष्णप्रकाश.

"सांगली जिले के मिरज शहर में बीते साल हुए दंगे राजनीतिक साजिश का नतीजा थे। ये दावा है सांगली जिले के पूर्व पुलिस अधीक्षक कृष्ण प्रकाश का। कृष्ण प्रकाश का आरोप है कि इन दंगों के पीछे राष्ट्रवादी कांग्रेस के तत्कालीन मेयर मैनुद्दीन बागवान का हाथ था। बागवान तो फिलहाल फरार हैं लेकिन माना जा रहा है कि कृष्ण प्रकाश को बागवान के खिलाफ केस दर्ज करने की वजह से हटाया गया।
बीते साल महाराष्ट्र के सांगली जिले का मिरज शहर दंगों के चलते सुलग उठा था। ऐन गणपति विसर्जन के दिन शहर में कर्फ्यू लग गया। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दस दिन तक मिरज शहर को कर्फ्यू झेलना पड़ा। इस कर्फ्यू का असर सांगली से लेकर कोल्हापुर जिले तक देखा गया। तब कहा गया था कि दंगे के पीछे शिवसेना नेता विकास सूर्यवंशी का हाथ है लेकिन अब आईपीएस अफसर कृष्ण प्रकाश ने खुलासा किया है कि इसके पीछे एनसीपी के तत्कालीन मेयर मैनुद्दीन बागवान का हाथ था। कृष्ण प्रकाश तब सांगली के एसपी थे और उन्होंने फरार मैनुद्दीन की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी भी की। इसी बीच उनका तबादला अहमद नगर के लिए हो गया. कृष्ण प्रकाश ने बताया कि जब पुलिस ने दो मुस्लिम भाइयों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया था कि तत्कालीन महापौर ने उन्हें इसके लिए उकसाया था और उनके बयान पर हमने आगे की कार्रवाई के लिए बात की।
फरार मैनुद्दीन बागवान ने अपनी अग्रिम जमानत के लिए अर्जी डाल रखी है लेकिन एसपी कृष्ण प्रकाश के तबादले की वजह बागवान को ही माना जा रहा है। बागवान एनसीपी के नेता तो हैं ही ग्राम विकास मंत्री जयंत पाटिल के करीबी भी हैं। इस वक्त भी गृह मंत्रालय यानि पुलिस महकमा एनसीपी के ही हाथ में है। हालांकि आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू होने के बाद सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।"-IBNKHABAR

सांगली के पुलिस अधीक्षक का यह बयान अपने आप में बताता है कि अपने आपको पाक-साफ और धर्मनिरपेक्ष बताने वाले दलों के नेता वोटों के लिये क्या कुछ नहीं कर गुजरते. दंगे ये भड़काते हैं और इलजाम औरों पर लगाते हैं. यदि एक पुलिस अधिकारी को इसलिये हटा दिया जाता है कि वह सही कार्रवाई कर रहा था तो इस देश की लुटिया डूबने से स्वयं खुदा (भगवान कहूंगा तो साम्प्रदायिक हो जाऊंगा) भी नहीं बचा सकता. वैसे मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं है कि इस मामले में श्रीयुत महेश भट्ट, जावेद-शबाना अख्तर, तिस्ता सीतलवाड़, तेजपाल और तमाम अन्य सामाजिक कार्यकर्ता कोई बयान देंगे. हमेशा हिन्दुओं के सर पर दंगों का ठीकरा फोड़ने वाले देखें कि किस तरह से एक ही पैटर्न पर पूरे देश में दंगे कराये जा रहे हैं या फिर कोशिश की जा रही है. पूरे देश को ही दंगों की कार्यशाला बनाकर रख दिया वोट के इन नापाक मुरीदों ने.  चूंकि सत्ताधारी दल का होने के कारण मैनुद्दीन की गिरफ्तारी से पहले ही पुलिस अधीक्षक को स्थानान्तरित कर दिया गया अत: इस बात की उम्मीद न के बराबर ही है कि अब मैनुद्दीन इस मामले में गिरफ्तार हो पायेगा और न ही दोषियों को सजा मिल सकेगी. ये लोग खुद दंगा भड़काते हैं और चिल्लाते हैं कि शिवसेना-भाजपा ने दंगा करा दिया. और जो लोग इन दंगाइयों का प्रतिकार करते हैं उन्हें पुलिस भी नहीं छोड़ती और दंगा भड़काने के आरोप में अन्दर कर देती है.
इस प्रकरण से साफ है कि किसी भी दल के लिये सामाजिक समरसता और धर्मनिरपेक्षता मात्र दिखावे के लिये है, फैशन के लिये है और लोगों को बेवकूफ बनाने के लिये है. न केवल हिन्दुओं को बल्कि उन सभी लोगों को भी, जो भारत को अपना देश मानते हैं, ऐसे लोगों को और ऐसे लोगों को बढ़ावा देने वालों की असलियत पहचानना चाहिये तथा इन्हें करारा जबाव दिया जाना चाहिये अन्यथा हम जबाव देने की स्थिति में ही नहीं रहेंगे.

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