मृतप्राय स्थिति हेतु क्षमा
इस मृतप्राय स्थिति हेतु सबसे पहले क्षमा कीजिये, क्योंकि मेरा मानना है कि कोई व्यक्ति जो पढ़ना लिखना जानता है और इसके बावजूद पढ़ता नहीं तो वह मृतप्राय ही है. 24 जुलाई से 31 जुलाई तक पढ़ूंगा तथा कुछ लिखने की भी चेष्टा करूंगा. अपने प्रिय ब्लागों पर टिप्पणियां अवश्य करूंगा. फिर सम्भवत: बीस बाईस दिनों का ब्रेक और फिर यूंही. शायद यह प्रक्रिया कुछ महीनों तक जारी रह सकती है. कुछ बातों पर मुझे राह दिखाने की कृपा करें.
१.पहला यह कि नेट बुक कौन सी ली जाये. Samsung की 14600- में उपलब्ध है.
२.लखनऊ से बलिया तक के इलाके के लिये कौन सा कनेक्शन अच्छा रहेगा. टाटा फोटान, रिलायन्स नेटकनेक्ट या फिर कोई अन्य.
३.मोबाइल को कम्प्य़ूटर से जोड़कर सर्फिंग करना उचित रहेगा अथवा नहीं.
अब एक पुस्तक के बारे में - मैंने विगत दिनों डा०अमृत लाल नागर का लिखा हुआ उपन्यास "मानस का हंस" पढ़ा. उपन्यास गोस्वामी तुलसीदास की जीवनी पर आधारित है. लेकिन गोस्वामी तुलसीदास जी की जीवनी को इतने रोचक ढ़ंग से डा०अमृत लाल नागर के अलावा शायद ही कोई दूसरा लेखक लिख पाता. नागर साहब ने इस उपन्यास के जरिये गोस्वामी जी को पाठक की आंखों के सामने साक्षात खड़ा कर दिया है.
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