गीत प्यार का कैसे गाऊं पेट में छाले पड़े हुये हैं.

गीत प्यार का कैसे गाऊं
पेट में छाले पड़े हुये हैं.
कैसे दीपक राग सुनाऊं
घर अंधियारे पड़े हुये हैं.
बाप की खांसी, मां की धड़कन
सब के सब अब बढ़े हुये हैं.
बिटिया बैठी ब्याह को अब तक
दाम वरों के चढ़े हुये हैं.
बापू कुछ मत लेकर आना
बच्चे जल्दी बड़े हुये हैं.
घास की रोटी खाये गरीबा
देव इसी पर अड़े हुये हैं.
भाई बैठा सोच रहा है
क्यों तेवर सबके चढ़े हुये हैं
घर की कुण्डी, कड़ियां, चौखट
नाम सभी पर चढ़े हुये हैं.
देख के निकलो घर से बाहर
दूत यमों के खड़े हुये हैं.

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