प्रधानमन्त्री के खाने में मिलावट हो गयी तो हाहाकार मच गया
जनता को अरहर दाल में खेसरी मिलाकर दी जा रही है. चावल में कंकड़, पत्थर मिलाकर दिये जाते हैं. सरसों के तेल में भटकटैया और न जाने किस किस चीज की मिलावट की जाती है. देसी घी में चर्बी, जीरे में झाडू की झाड़न, काली मिर्च में पपीते के बीज. हल्दी में रंग और गेरू. मिर्च में रंग. मिठाईयों में मिलाये जा रहे कुछ रंग तो जानलेवा हैं. हर रोज ही किसी न किसी चैनल पर दिखाया जा रहा है कि किस तरह से हरी सब्जियों को हरे रंग की उस डाई से रंगा जाता है जो कपड़ा रंगने में काम आती है. लौकी में आक्सीटोसिन का इन्जेक्शन, जो दुधारू पशु को देने पर उसकी हड्डी को भी निचोड़ देता है. यूरिया, सर्फ से बनाया जाने वाला नकली दूध. कैमल का दूध अर्थात कैमल के सफेद रंग का प्रयोग करके बनाये जाना वाला दूध जनता को पिलाया जा रहा है. बाजार में बिकने वाले डिब्बाबंद पदार्थ भी इससे अछूते नहीं हैं. शीतल पेयों में पेस्टीसाइड होने की बात अभी अधिक पुरानी नहीं हुई. लिस्ट बहुत लम्बी है, कहने का तात्पर्य यह कि हमारी रसोई में आने वाली हर चीज मिलावटी है और शरीर के लिये घातक भी. मैंने खुद मण्डी में सड़े हुये कटहल से बीज निकालते हुये देखा (जिन बीजों को बेचा जा रहा था) और शिकायत भी की, लेकिन हुआ कुछ नहीं.
असल मुद्दा यह कि प्रधानमन्त्री जी की दाल में रंग निकल आया और खरबूजे में थोड़ी सी फंगस तो पूरे देश में बवाल हो गया, तुरन्त जांच बिठा दी गयी और एक दिन में रिपोर्ट तैयार भी तैयार कर दी गयी. संभवत: इस रिपोर्ट पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई भी हो जायेगी, लेकिन फिर वही प्रश्न, कि आम आदमी जो वोट देकर सरकारें बनाता है, जो टैक्स देकर अधिकारियों की आजीविका चलाता है, उसकी रसोई में लगभग हर पदार्थ मिलावटी पहुंच रहा है, उसके हितों की रक्षा करने के लिये अधिकारी क्या मंगल ग्रह से आयेंगे. अधिकारी-नेता-व्यापारी यह ऐसा त्रिभुज बन चुका है जिसे आम जनता से कोई सरोकार नहीं, वह लुटती है तो लुटती रहे. बाकी सबके हित सधते रहें. बेवकूफ बनाकर रख दिया है प्रधानमन्त्री के खाने में मिलावट हो गयी तो हाहाकार मच गया और आम आदमी जिसकी थाली में व्यापारी-नेता-अफसर गठजोड़ के चलते जहर पहुंचता रहता है तो कोई बात नहीं. थू है इस भ्रष्ट तन्त्र पर.
असल मुद्दा यह कि प्रधानमन्त्री जी की दाल में रंग निकल आया और खरबूजे में थोड़ी सी फंगस तो पूरे देश में बवाल हो गया, तुरन्त जांच बिठा दी गयी और एक दिन में रिपोर्ट तैयार भी तैयार कर दी गयी. संभवत: इस रिपोर्ट पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई भी हो जायेगी, लेकिन फिर वही प्रश्न, कि आम आदमी जो वोट देकर सरकारें बनाता है, जो टैक्स देकर अधिकारियों की आजीविका चलाता है, उसकी रसोई में लगभग हर पदार्थ मिलावटी पहुंच रहा है, उसके हितों की रक्षा करने के लिये अधिकारी क्या मंगल ग्रह से आयेंगे. अधिकारी-नेता-व्यापारी यह ऐसा त्रिभुज बन चुका है जिसे आम जनता से कोई सरोकार नहीं, वह लुटती है तो लुटती रहे. बाकी सबके हित सधते रहें. बेवकूफ बनाकर रख दिया है प्रधानमन्त्री के खाने में मिलावट हो गयी तो हाहाकार मच गया और आम आदमी जिसकी थाली में व्यापारी-नेता-अफसर गठजोड़ के चलते जहर पहुंचता रहता है तो कोई बात नहीं. थू है इस भ्रष्ट तन्त्र पर.
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