श्रीमान सिरिल जी, कृपया ब्लागवाणी को सक्रिय करें......

ब्लागवाणी वापस आओ. तुम्हारे बिना अच्छा नहीं लग रहा है. लोग अपनी पोस्ट पर लगने वाले चटके, पाठकों की संख्या, हाट लिस्ट को देखते थे. लेकिन अब सब कुछ बन्द है. मुझे पता नहीं कि क्या कारण रहे कि श्रीमान मैथिली जी और सिरिल जी की इस अमूल्य स्थापना को बन्द कर दिया गया है. जो भी कारण रहे हों लेकिन तुम्हारे बिना अच्छा नहीं लग रहा है. एक अधूरेपन का, खालीपन का अहसास हो रहा है, तुम्हारे क्रियाशील न होने से. अभी तक जितने भी हिन्दी ब्लाग के एग्रीगेटर रहे उनमें ब्लागवाणी का स्थान अनूठा रहा है. अठारह जून से अब तक ब्लागवाणी के निष्क्रिय होने से एक निर्वात सा आ गया है. चूंकि मुझे अधिक कुछ जानकारी नहीं है, इसलिये यही कहना चाहूंगा ब्लागवाणी के संचालकों से कि इसे फिर से सक्रिय करने की कृपा करें.

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