विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित रूफ टाप रेन वाटर कलेक्शन




विकास प्राधिकरणों से शहर का विकास होता हो या न होता हो, अधिकारियों का विकास अवश्य हो जाता है. शहर के विकास प्राधिकरण ने सरकारी कार्यालयों में रूफ टाप रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिये वर्षा-जल संग्रहण हेतु पिट/पूल बनवाये. कहने की आवश्यकता नहीं कि इस परियोजना के लिये करोड़ों रुपये सरकार ने जारी किये.  लेकिन चित्र खुद बयान कर रहे हैं कि इन का हश्र क्या हुआ. एक सरकारी कार्यालय में बनाये गये इन गड्ढों का हाल देखिये. न तो इन्हें मानकों के हिसाब से खोदा गया, न ही इनमें उतना कोयला इत्यादि डाला गया, जितने की आवश्यकता थी. पहले वर्ष गड्ढ़े बनाये गये लेकिन इन्हें जोड़ने की जहमत नहीं उठाई गयी. पता चला कि दूसरे वर्ष आकर कुछ सफाई की गयी और फिर नया बोर्ड लगा दिया गया, कुछ फोटो-वोटो भी खिंचवाये गये. जिस छत से पानी को नीचे लाकर गड्ढ़े में भरा जाना था, उस छत से आने वाला पाइप टूटा हुआ है, जिसे जोड़ने की जहमत उठाई ही नहीं गयी. धीरे-धीरे लोगों ने भी इस गड्ढे को कूड़ाघर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. शायद सभी सरकारी परियोजनायें इसी तरह से लागू की जाती हैं. और फिर इन्हें लागू करवाने वाले भी तो भारतवासी ही हैं, जब उनका विकास होगा तभी तो देश का विकास होगा. इसलिये चलिये प्रगति की राह पर.

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