मेरे पिछले ब्लाग में कहीं कोई वायरस घुस गया था. लिहाजा इस ब्लाग पर मैंने कोई भी थर्ड पार्टी विजेट नहीं लगाये. मुझे दिक्कत हो रही थी कि मैं ब्लागवाणी के बंद होने के बाद फीड प्राप्त नहीं कर पा रहा था. कुछ रेडीमेड स्क्रिप्ट मिली, लेकिन मेरी आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं थीं. feeds2js.org पर एक प्रारूप उपलब्ध था, बस आवश्यकता थी, उसमें अपनी आवश्यकतानुरूप सुधार करने की, उसे करने के बाद मैंने चिट्ठाजगत की फीड प्राप्त करने के लिये संशोधित कर अपने ब्लाग पर लगा लिया. कोड नीचे दिया गया है. कृपया आप लोग मुझे बताने की कृपा करें कि इस नये ब्लाग को खोलने पर तो वायरस/मालवेयर की चेतावनी तो नहीं आ रही.
चुनाव आयोग ने मतदाताओं को अधिक मतदान हेतु प्रेरित करने के लिए अपने एम्बेसडर नियुक्त किये हैं जो विभिन्न नगरों का दौरा कर मतदाताओं को प्रोत्साहित करने का कार्य कर रहे हैं. एक दो नेताओं के भी बयान समाचारपत्रों में पढ़ने को मिले हैं जिसमें उन्होंने अधिकाधिक मतदान करने की अपील की है. १. क्या जनप्रतिनिधि चुनना विवाह करने से कम महत्वपूर्ण कार्य है, क्योंकि एक व्यस्क पुरुष को विवाह करने के लिए कम से कम २१ वर्ष का होना आवश्यक है जबकि सरकार बनाने के लिए जनप्रतिनिधि को चुनने के लिए विवाह की उम्र से ३ वर्ष कम होना पर्याप्त है. २. मतदान का प्रतिशत न्यूनतम ३५ से अधिकतम ६० रहता है. अब इसे और सूक्ष्म दृष्टि से देखने पर पता चलता है कि डाले गए मतों में से अधिकांश मत ३-४ प्रत्याशियों के मध्य बंट जाते हैं. जिसमें से पुनः देखने पर ज्ञात होता है कि जो प्रत्याशी १५-२५ प्रतिशत मत पा जाता है वह विजयी बन जाता है. ३. अब यदि बहुमत की प्रक्रिया को माना जाए तो ५१ = १०० होना चाहिये, लेकिन यहाँ स्थिति यह है कि १५ से २५ = १००. आगे फिर देखें तो पता चलता है कि सदन में जिस या जिन दलों के पास निर्वाचित प...
खबर पढ़ रहा था कि सिलीगुड़ी में एक तेंदुआ जंगलों से भटककर आ गया. इसी प्रकार मध्यप्रदेश के मुख्यमन्त्री के निवास के पास भी एक तेंदुआ पकड़ा गया. महाराष्ट्र में भी ऐसी कई घटनायें हुई हैं. कारण है कि भारत में मनुष्यों की आबादी तेजी से बढ़वाई जा रही है, जिन्हें रहने के लिये घर चाहिये तो उसके लिये खेतों का नाश किया जाता है और जब खाना चाहिये तो जंगल काटकर खेत बनाये जाते हैं. अब ऐसे पशु-पक्षी कहां जायें जिनका गुजारा ही जंगलों से होना है, नतीजा होता है कि वे कभी-कभी शहरों की तरफ आ जाते हैं और फिर जो सौभाग्यशाली होते हैं, वे पकड़ लिये जाते हैं जीवित. तथा जिनका भाग्य अच्छा नहीं होता वे सिलीगुड़ी वाले तेंदुये की तरह मारे जाते हैं. इतने बड़े देश में आजादी के चौंसठ साल बाद भी हमारे पास ऐसे प्रशिक्षित कर्मी नहीं हैं जो एक तेंदुये पर उचित मात्रा में ट्रैक्वलाइजर का प्रयोग कर उसे बेहोश कर पकड़ सकें. मैं अभी चित्र देख रहा था जहां उस पर बंदूकों से ऐसे हमला किया जा रहा था वैसा तो किसी आतंकवादी पर भी नहीं किया जाता होगा. मैं तो उन लोगों को धन्य कहता हूं जो विदेशी हैं किन्तु मानवीय जानों के साथ, अन्य प्राणियों...
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