चतुर्वेदी जी की पोस्ट पर टिप्पणी

बहुत नन्हीं सी पोस्ट है. एक बड़े स्वनामधन्य विद्वान व्यक्ति हैं.  जिनका ब्लाग कहता है "यह ब्लॉग हिन्दी में मीडिया,मासकल्चर,राजनीति,ज्योतिष आदि विषयों पर विज्ञानसम्मत विश्लेषण का केन्द्र है।..........। ...... के हि‍न्‍दी वि‍भाग में प्रोफेसर। मीडि‍या और साहि‍त्‍यालोचना का वि‍शेष अध्‍ययन". आजकल रामदेव जी के ऊपर विशेष कृपा है. जाहिर है कि अपनी तरफ से बहुत अच्छा लिख रहे हैं.  टिप्पणियों की दरकार है तो बाक्स भी खुला है और उसमें कोई दरवाजा भी नहीं. मतलब कि माडरेशन लगाया नहीं और एनोनिमस तक की सुविधा दे रखी है. आज प्रात: बड़ी तारीफ की थी बाबा की, एक टिप्पणी मैंने भी लगा दी, थोड़ी देर बाद महोदय ने टिप्पणी उड़ा दी. अभी जब दोबारा देखा तो पता चला कि मेरे साथ और भी टिप्पणियां हटाई गयी थीं, इस तर्क के साथ कि विषय से हटकर थी और अनर्गल थीं. 
उनकी नय़ी पोस्ट पर टिप्पणी करना चाहता था, लेकिन उनके ब्लाग पर नहीं, यहां कर रहा हूं.
"बाबा ने जो अर्जित किया है, कोई भी कर सकता है. लेकिन हसद होती है, जब यह लगता है कि मुझसे कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति इस ऊंचाई तक कैसे पहुंच गया. मुझे भी होती है जब मैं अपने से आगे निकलते हुये किसी व्यक्ति को देखता हूं. किसने मना किया है कि एसी में एक कपड़ा धारण कर  रहने को. आप भी रहकर दिखाओ. किसने  बाबा की तरह फैक्ट्री लगाने को मना किया है, आप भी लगा लो. किसने मना किया है आपको चार-छ: योगासन सीखकर दुनिया को गुमराह करने को. आप भी करो. किसने मना किया है करोड़ों और अरबों रुपये चन्दे में लेने को. यदि लेने की कूबत है तो आप भी ले लो. किसने मना किया है योग को कार्पोरेट में बदलने को. आप अपनी विद्या को कार्पोरेट की तरह प्रस्तुत करो. पतंजलि योग के माध्यम से बाबा हिन्दू धर्म को फैला रहे हैं, आप ने योग के बारे में जो सही बात खोजी है उसे फैलाकर हिन्दू धर्म  के इस प्रसार को रोको. बाबा के पास वक्तृत्व कला है, आप उनसे बेहतर बनाओ. माननीय़, रेखा को छोटा करने के लिये उसके किनारे बिगाड़ने की कोशिश करने के स्थान पर उससे बड़ी रेखा खींचने का प्रयत्न कीजिये. बाबा के द्वारा हासिल किये जा रहे जन-समर्थन से अच्छों-अच्छों को पसीना आ गया है. जिन मुद्दों की तथा जिन मुद्दों पर जो बेबाक बात बाबा कहते हैं, उनमें क्या सही है और क्या गलत है, उस पर भी कलम उठाइये. एक चोर-डकैत-बलात्कारी-हत्यारे का सांसद बनना उचित है और एक संन्यासी का गलत. लालाओं द्वारा अनाप-शनाप मंहगाई बढ़ाकर देश को लूटना उचित है और बाबा द्वारा दान ग्रहण कर फार्मेसी लगाना गलत. एक बार पुन: सोचियेगा. और अन्त में प्रार्थना है कि टिप्पणी बाक्स हटा लें या फिर उन टिप्पणियों को भी रहने दें जो आपकी विचारधारा से मेल नहीं खातीं, यद्यपि शालीनता की हद से परे किसी भी टिप्पणी का प्रकाशन कोई भी नहीं चाहता, मैं भी नहीं"

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