ओबामा का दौरा

मीडिया वाले तीन-चार दिन से दीवाने हुये हैं. ओबामा साहब जो तशरीफ लाने वाले थे, इसलिये. कितने कुत्ते हैं, कितनी गाड़ियां, कितने हेलीकाप्टर, हवाईजहाज, कितने सुरक्षाकर्मी और भी न जाने क्या क्या. जहाज में क्या लगा है, क्या खाते हैं, क्या पीते हैं और भी न जाने क्या क्या. बस नहीं चलता वरना कौन सा टायलेट पेपर इस्तेमाल करते हैं, परिवार नियोजन के लिये कौन सा तरीका अपनाते है, इसकी भी एक्स्क्लूसिव रिपोर्ट पेश कर देते. बराक ओबामा का पूरा नाम बराक "हुसैन" ओबामा है,  इसे बताने के लिये एक धर्मनिरपेक्ष न्यूज चैनल के एंकर ने दस मिनट के प्रोग्राम में पचास बार "हुसैन" पर विशेष जोर देकर बोला. हालांकि डेविड कोलमैन हेडली को एक बार भी इस एंकर ने "दाऊद गिलानी"   कहने की हिम्मत नहीं जुटाई. यह तो ट्रैक से जुदा बात हो गयी.
कल से खबरिया चैनल यह जताने की कोशिश कर रहे थे कि ओबामा साहब के आते ही पता नहीं क्या हो जायेगा. ओबामा आयेंगे और आते ही आते पाकिस्तान को लताड़ेंगे, उस पर धावा बोल देंगे, दाना-पानी लेकर चढ़ दौड़ेंगे. जादू कर देंगे, कायाकल्प कर देंगे भारत का. भारत को डेविड कोलमैन हेडली अर्थात दाऊद गिलानी को सौंप देंगे.  मतलब यह कि जो काम भारत को करना चाहिये उसकी उम्मीद अमेरिका से कर रहे हैं. पड़ोस का शैतान लड़का हमारे घर पर पत्थर फेंक कर शीशे तोड़ता है और हम उससे कुछ कहने या दो थप्पड़ लगाने की जगह उसके दूर के रिश्तेदार, जो उसे शह भी देता है, से गुहार लगाते हैं कि पड़ोस में रहने वाले लड़के को सम्भालो, डांटो और हो सके तो चपत लगा दो. अपने घर के गद्दारों को सम्भाल नहीं पाते. कसाब का मामला अभी तक चल रहा है. अफजल अभी तक मौज कर रहा है. मोहनलाल शर्मा की शहादत पर सवालिया निशान उठाने वाले बगलगीर हो गये हैं. मुम्बई में हुये आतंकवादी हमले को भगवा आतंकवादियों की साजिश बताने वाले सत्ता का आनन्द ले रहे हैं. बात करते हैं कि कानून का राज है. किसके कानून का? सत्ताधारियों के इशारे पर जिसकी धारायें लगायी, बदली जाती हैं. कभी सीबीआई किसी के ऊपर गाज बन गिरती है तो किसी के खिलाफ चार्ज वापस ले लेती है. किसी को नार्को एनालिसिस के आधार पर तफ्तीश करने के बाद गिरफ्तार कर लिया जाता है तो नार्को एनालिसिस में तेलगी द्वारा लिये गये नामों में से एक भी राजनीतिबाज से पूछताछ तक नहीं होती.
दाऊद गिलानी को भारत लाकर करेंगे क्या? अमेरिका में तो उसे जो भी सजा होना है हो ही जायेगी, लेकिन भारत में क्या होगा. यहां तो अपराधी को गिरफ्तार कराने का मतलब सजा  दिलाना नहीं होता है, उसे गिरफ्तार कराने का मतलब होता है छुड़वाना. अमेरिकी राष्ट्रपति का उद्देश्य बिल्कुल साफ है. वह अपने  राजनैतिक, व्यापारिक और सामरिक हितों की पूर्ति हेतु भारत की यात्रा पर हैं. जैसा कि उन्होंने अपने भाषण में बता भी दिया. भारत की यात्रा से अमेरिका के साथ कई बिलियन डालर के सौदे होंगे, अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिये जिससे बहुत लाभ होगा. अर्थव्यवस्था में नई जान आयेगी और अमेरिका में रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे. अमेरिका अपने हितों की पूर्ति हेतु भारत को प्रयोग करना चाहता है. लेकिन भारत के राजनीतिबाजों और उद्योगपतियों में यह चिन्तन कहां. उनके अपने हित समग्र भारतीयों के हित से कहीं ऊपर हैं. सीखना है तो अमेरिका से यह सीखिये कि कानून-व्यवस्था सबके लिये समान रूप से कैसे लागू की जाती है, कैसे अपने और अपने नागरिकों के हितों की रक्षा सात समुन्दर पार भी की जाती है. अमेरिका से यह सीखिये कि कानून कितनी तेजी से काम करता है और कैसे बिना किसी भेदभाव के और तेजी से काम करता है. ओबामा की वंदना से या अमेरिकी नीतियों की निन्दा करने से काम नहीं चलता. देश में भ्रष्टाचार, साम्प्रदायिकता (जिसे मैं छद्म धर्मनिरपेक्षता कहता हूं), गरीबी, बढ़ती हुई जनसंख्या और बेरोजगारी बहुत बड़ी समस्यायें हैं, इन पर ध्यान देने की आवश्यकता है. वरना कहीं ऐसा न हो कि इतिहास में लिखा जाये कि इस वर्ष से इस वर्ष तक जिन नेताओं ने देश पर राज किया उनकी अदूरदर्शिता, भाई-भतीजावाद, भ्रष्टाचार के चलते भारत रसातल में पहुंच गया..

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