पाबला जी की माता जी, खुशदीप जी और डा०दराल जी के पिताजी का गुजरना...

उपर्युक्त  तीन दुखद घटनाओं से वास्ता पड़ा. मां-बाप के बिछोह से अधिक बड़ा दुख तो कोई हो ही नहीं सकता. मैं सोच रहा था कि क्या मां की गोद में लेटने और बाप की पीठ पर चढ़ने से अधिक बड़ा सुख दुनिया में कोई हो सकता है........

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