तिरंगा क्या दुश्मन देश का झंडा है?

एक राजनीतिक दल लाल चौक, श्रीनगर (कश्मीर घाटी) में छब्बीस जनवरी अर्थात गणतन्त्र दिवस को तिरंगा फहराना चाहता है. उमर अब्दुल्ला कहते हैं कि वे (राजनीतिक दल वाले)  शांत कश्मीर में आग लगाना चाहते हैं और झण्डा फहराने से यदि कोई तनाव फैलता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उस राजनीतिक दल की होगी. भारत का राष्ट्रीय ध्वज एक सार्वजनिक स्थल पर फहराने से तनाव हो सकता है, आग लग सकती है! कमाल है! भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराने से इतना सबकुछ. जो लोग भारतीय झण्डे को फहराने की खिलाफत कर रहे हैं क्या वह भारत की सीमाओं में रहने के योग्य हैं. क्या वह भारतीय कहलाने और भारतीय जमीन पर गुजर-बसर करने के हकदार हैं. ऐसे लोगों को तुरन्त देश से बाहर निकाल दिया जाना चाहिये. और अब्दुल्ला साहब क्या आपकी पुलिस भारतीय झण्डे की रक्षा भी नहीं कर सकती. आपका यह बयान क्या साबित करना चाहता है? देश एक नितान्त नाजुक मोड से गुजर रहा है. राजनीतिबाज अपनी रोटियां सेंकने के लिये कुछ भी कर सकते हैं. कश्मीर को हिन्दुओं से विहीन पहले ही किया जा चुका है. अलगाववादी पूरे कश्मीर को कब्जा चुके हैं. धर्म के नाम पर ही घाटी में अलगाववादी ताकतें सिर उठाती हैं और उनके लिये खाद-पानी का इन्तजाम हमारे राजनीतिबाज कर रहे हैं. चीन के थिंक टैंक को अधिक परेशान होने या कुछ करने की आवश्यकता नहीं है. हमारे राजनीतिबाज ही अपने स्वार्थों के चलते देश को दांव पर लगाने के लिये तैयार बैठे हैं.

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