ए०राजा के सहयोगी बाचा की मौत, और हमारे नेता चाहते हैं लोकायुक्त के अधिकारों की समीक्षा

टेलीकाम घोटाले के आरोपी ए०राजा के निकट रहे सादिक बाचा ने आत्महत्या कर ली. सादिक की कम्पनियों में टेलीकाम घोटाले की धनराशि लगाने का संदेह था. सादिक बाचा से कई दौर की पूछताछ की जा चुकी थी और अब जब सादिक बाचा ही नहीं रहा तो एक अहम गवाह की गवाही सिरे से गयी. लिहाजा टेलीकाम घोटाले की भी धीरे-धीरे शान्ति से ठण्डे पड़ने की पूरी सम्भावना है.

शीला दीक्षित जी कह रही हैं कि लोकायुक्त के अधिकारों की समीक्षा होना चाहिये. बसपा के एक विधायक भी कहते हुये दिखाई दिये कि राजनीति में तो झूठी शिकायतें भी बहुत होती हैं और हर शिकायत पर नोटिस, ये-वो होने लगा तो बहुत दिक्कत हो जायेगी. मजे की बात यह है कि यह तय कौन करेगा कि शिकायत सच्ची है या झूठी, इसी के लिये तो लोकायुक्त बनाया गया है. लोकायुक्त जिस मन्त्री को हटाने की सिफारिश करते हैं, उस मन्त्री को अभी तक पद पर रखा गया है. शायद यही तरीका है भ्रष्टाचार से लड़ने का.

Comments

  1. सही माँग है जी बिल्कुल। ये लोकायुक्त वगैरह सीरियसली लेने की चीज थोड़ी ही होते हैं।

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  2. अभी सब टपकेंगे धीरे धीरे।

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  3. भ्रष्टाचार की तस्वीर देखनी हो तो हमारे देश के लोकतंत्र से बेहतर कोई दूसरी नहीं होगी । सबूत मिटते देर नहीं लगती है यहाँ ।

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  4. लालू की पढ़ाई पट्टी है जी ! जैसे बिहार में चारा घोटाला उजागर होने के बाद उसके घोटाला सहयोगी एक-एक कर कोई सड़क दुर्घटना में कोई ट्रक की चपेट में आकर, कोई बीमारी से संग्दिग्ध मौत मर गए और लालू जिंदाबाद रहा , वही रणनीति इसमें भी अपनाई जा रही है लगता है ! रही बात लोकायुक्त के तो यह सिर्फ कौन्ग्रिसियों और उनके पालतू श्वानों के लिए वहां भौकने का हथियार है जहां विपक्ष की सर्कार हो जैसे आपको मालूम होगा की कर्नाटका के लोकायुक्त की रिपोर्ट पर इन्होने कितनी चिल-पों मचाई थी अभी हाल ही में !

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  5. Ab agla kaun.... breaking news ka wait kare ?

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