क्या इन्हें मानव कहा जा सकता है? यह किस धर्म को मानते हैं, कौन सी शिक्षा ग्रहण कर आये हुये लोग हैं जो एक नौजवान को सरेआम गोली दाग कर मौत के घाट उतार देते है ? इतना निर्मम , क्रूर और जघन्य आचरण!
मित्र , इस क्लिप से ये सीख लेने की जरूरत है कि अभी भी वक्त है ,संभल जाओ वर्ना भारत में भी ऐसे कांड होंगे और हमें ऐसी क्लिपें बनाने और देखने का दुर्भाग्य अपनों गाँवों , मोहल्लों और चौराहों पर आसानी से मिलेगा |
भारत मे भी यही कुछ हो रहा है मित्र बस्तर मे आदिवासी समाज सलवा जुड़ूम और नक्सलवाद के नाम पर ऐसे ही एक दूसरे के खूण का प्यासा हो गया है और इस खूनखराबे मे उम्र लिंग या संबंधो का भी लिहाज नही जो भी विरोधी खेमे का हाथ लगा उसकी मौत इससे भी बुरी तय है ।
चुनाव आयोग ने मतदाताओं को अधिक मतदान हेतु प्रेरित करने के लिए अपने एम्बेसडर नियुक्त किये हैं जो विभिन्न नगरों का दौरा कर मतदाताओं को प्रोत्साहित करने का कार्य कर रहे हैं. एक दो नेताओं के भी बयान समाचारपत्रों में पढ़ने को मिले हैं जिसमें उन्होंने अधिकाधिक मतदान करने की अपील की है. १. क्या जनप्रतिनिधि चुनना विवाह करने से कम महत्वपूर्ण कार्य है, क्योंकि एक व्यस्क पुरुष को विवाह करने के लिए कम से कम २१ वर्ष का होना आवश्यक है जबकि सरकार बनाने के लिए जनप्रतिनिधि को चुनने के लिए विवाह की उम्र से ३ वर्ष कम होना पर्याप्त है. २. मतदान का प्रतिशत न्यूनतम ३५ से अधिकतम ६० रहता है. अब इसे और सूक्ष्म दृष्टि से देखने पर पता चलता है कि डाले गए मतों में से अधिकांश मत ३-४ प्रत्याशियों के मध्य बंट जाते हैं. जिसमें से पुनः देखने पर ज्ञात होता है कि जो प्रत्याशी १५-२५ प्रतिशत मत पा जाता है वह विजयी बन जाता है. ३. अब यदि बहुमत की प्रक्रिया को माना जाए तो ५१ = १०० होना चाहिये, लेकिन यहाँ स्थिति यह है कि १५ से २५ = १००. आगे फिर देखें तो पता चलता है कि सदन में जिस या जिन दलों के पास निर्वाचित प...
खबर पढ़ रहा था कि सिलीगुड़ी में एक तेंदुआ जंगलों से भटककर आ गया. इसी प्रकार मध्यप्रदेश के मुख्यमन्त्री के निवास के पास भी एक तेंदुआ पकड़ा गया. महाराष्ट्र में भी ऐसी कई घटनायें हुई हैं. कारण है कि भारत में मनुष्यों की आबादी तेजी से बढ़वाई जा रही है, जिन्हें रहने के लिये घर चाहिये तो उसके लिये खेतों का नाश किया जाता है और जब खाना चाहिये तो जंगल काटकर खेत बनाये जाते हैं. अब ऐसे पशु-पक्षी कहां जायें जिनका गुजारा ही जंगलों से होना है, नतीजा होता है कि वे कभी-कभी शहरों की तरफ आ जाते हैं और फिर जो सौभाग्यशाली होते हैं, वे पकड़ लिये जाते हैं जीवित. तथा जिनका भाग्य अच्छा नहीं होता वे सिलीगुड़ी वाले तेंदुये की तरह मारे जाते हैं. इतने बड़े देश में आजादी के चौंसठ साल बाद भी हमारे पास ऐसे प्रशिक्षित कर्मी नहीं हैं जो एक तेंदुये पर उचित मात्रा में ट्रैक्वलाइजर का प्रयोग कर उसे बेहोश कर पकड़ सकें. मैं अभी चित्र देख रहा था जहां उस पर बंदूकों से ऐसे हमला किया जा रहा था वैसा तो किसी आतंकवादी पर भी नहीं किया जाता होगा. मैं तो उन लोगों को धन्य कहता हूं जो विदेशी हैं किन्तु मानवीय जानों के साथ, अन्य प्राणियों...
लानत है!
ReplyDeleteजिसने यह क्लिप बनाकर इन दरिन्दों को एक्सपोज़ किया, अब उसकी जान खतरे में है।
वीभत्स .....
ReplyDeleteइतना निर्मम लानत है
ReplyDeleteदिल दहल गया ....
ReplyDeleteक्रूरता की पराकाष्टा!
ReplyDeleteमित्र , इस क्लिप से ये सीख लेने की जरूरत है कि अभी भी वक्त है ,संभल जाओ वर्ना भारत में भी ऐसे कांड होंगे और हमें ऐसी क्लिपें बनाने और देखने का दुर्भाग्य अपनों गाँवों , मोहल्लों और चौराहों पर आसानी से मिलेगा |
ReplyDeleteएशियाई मुल्कों की पुलिस कुछ ज्यादा हीं बर्बर हैं।
ReplyDeleteभारत मे भी यही कुछ हो रहा है मित्र बस्तर मे आदिवासी समाज सलवा जुड़ूम और नक्सलवाद के नाम पर ऐसे ही एक दूसरे के खूण का प्यासा हो गया है और इस खूनखराबे मे उम्र लिंग या संबंधो का भी लिहाज नही जो भी विरोधी खेमे का हाथ लगा उसकी मौत इससे भी बुरी तय है ।
ReplyDeleteसम्माननीय अरुणेश जी यही तो परेशानी है कि जज,जूरी,जल्लाद सब बन जाती है पुलिस.
ReplyDeletekya kahen lanat hai esi vyavastha ko ... nirmam
ReplyDeleteजघन्य अपराध।
ReplyDeleteइस्लामी मुल्कों में सरेआम पत्थर मार-मार कर मारने की परम्परा बहुत पुरानी है। अब यह भी देखना रह गया था।
ReplyDeleteवीडियो हृदयविराक. इंसान की जान की कीमत ये !
ReplyDeleteहृदयविराक=हृदयविदारक
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