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भंवरा और फूल

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अगर कैद ऐसी हो तो फिर क्या बात है. पता नहीं भंवरा ही है या फिर और कोई कीट लेकिन फूलों के पराग का मजा लेता हुआ। आप भी आनंद लें।

बाबा रामदेव द्वारा भारत स्वाभिमान ट्रस्ट की स्थापना और उन पर लगाये गए आरोप

पिछले दिनों बाबा रामदेव द्वारा भारत स्वाभिमान ट्रस्ट की स्थापना की गई जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने के लिये कार्य करना है। एक वेब-पत्रिका पर बाबा रामदेव के इस कदम के बारे में काफी विस्तृत जानकारी दी गयी थी. जाहिर है कि इस लेख पर लोगों ने टिप्पणियां भी की थीं. कुछ टिप्पणियों में यह कहा गया था कि बाबा लूट रहे हैं, बाबा ने इतने करोड़ रुपया कमा लिया है, उनकी फार्मेसी का टर्न-ओवर इतना है. बाबा हिन्दू धर्म का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं,बाबा ने चार-छ: कलाबाजी सीख ली हैं, बाबा प्रोपेगैण्डा कर रहे हैं और बाबा अब राजनीति में आकर सत्ता कब्जाना चाहते हैं. मैं ऐसे व्यक्तियों से कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूं :- ऐसे कितने लोग हैं जो स्वयं या अपने बच्चों को बाबा की भांति बनाना चाहेंगे. ऐसे कितने लोग हैं जो अपने शारीरिक, भौतिक और सामाजिक सुखों को त्यागना चाहेंगे. क्या फार्मेसी चलाना कोई गुनाह है. क्या ये लोग बतायेंगे कि बाबा ने किसके लिये इतने रुपये इकठ्ठा किये. क्या इन लोगों को नहीं पता है कि हरिद्वार में कितना बड़ा चिकित्सालय-विश्वविद्यालय बाबा ने बनाकर खड़ा किया है क्या बाबा जबरदस्...

स्वात में पत्रकार की हत्या, कानपुर में युवक की हत्या, आईएस ने पुलिसवाले को हड़काया , सी-बी-आई को मिली एक सफलता

पिछ्ले लेख में मैंने लिखा था कि स्वात घाटी में शरिया कानून लागू हो गये हैं और भारत के लिये यह खतरे की घन्टी है. भारत की सभी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियों (हालांकि मेरे नजरिये से धर्मनिरपेक्ष होना किसी के लिये भी ठीक नहीं है, इस पर चर्चा फिर किसी दिन होगी) को मुस्लिम वोटों को पाने के लिये कट्टरपंथी मुस्लिम तत्वों को बढ़ावा देना तत्काल बन्द करना चाहिये अन्यथा जो आग आज स्वात घाटी को जला रही है वही आग कल भारत को जलाना प्रारम्भ कर देगी. अल-कायदा, तालिबान, हूजी, लश्कर समेत तमाम आतंकवादी गुटों का अगला निशाना भारत है, यह किसी से ढका-छुपा नहीं है. स्वात घाटी में शरिया कानून लागू किये जाने के बाद अब तालिबानों ने वहां से पाकिस्तान की फौज को हटाने का भी फरमान जारी कर दिया है. यह दिखाता है कि कट्टरपंथी इस्लामी तत्व बहुमत में आने के बाद किस तरह का व्यवहार करते हैं. अन्य धर्मों के लिये तो उनके पास किसी प्रकार की सहिष्णुता की भावना की उम्मीद क्यों कर की जा सकती है जब वह स्वयं इस्लाम के अनुयायियों के प्रति भी मानवीय व्यवहार नहीं अपनाते. मूसा खान नामक पत्रकार की हत्या और स्वात में इन तालिबानियों के आदेश...

सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण तथा जनता के पैसों का दुरूपयोग

बरेली में कई मन्दिर मस्जिद सड़क घेर कर बनाये गये हैं. ऐसा लगता है कि पिछले बीस-पचीस सालों में ही यह सब उग आये हैं. पिछले दिनों मोदी की चलाई एक मुहिम याद आ गयी जो अच्छी थी लेकिन जिसका व्यापक विरोध हुआ और मोदी (जो मुस्लिम विरोधी तो पहले ही थे, हिन्दू विरोधी भी ठहरा दिया), जिसमें सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण किये हुए मन्दिर-मस्जिद-मजार ध्वस्त किये जा रहे थे. काश ऐसा पूरे देश में हो जाये. जिला और मंडल स्तर के अधिकारियों के लिये जो बंगले दिये गये है वह कई-कई बीघों में फैले हैं जिनकी आवश्यकता समझ में नहीं आती. आखिर एक परिवार को कितनी जगह चाहिये रहने के लिये? यहीं विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के लिये एक मकान बनाया है प्राधिकरण में जो लगभग ३५०-४०० गज में बना होगा, डुपलेक्स है और मेरे खयाल से छ:-सात कमरे होंगे जो सभी वातानुकूलित लगते हैं, बाहर से देखकर अंदाजा लगाया था. दस-बारह नौकर, जो सम्भवत: सरकारी ही होंगे, सेवा में लगे हुये दिखाई दिये. सुरक्षा के लिये भी एक सब-इन्स्पेक्टर रैंक का अधिकारी लगा था. मैं यह सोच रहा हूं कि अगर एक अधिकारी के ऊपर इतना खर्चा आता है तो ऐसे लाखों अधिकारियों पर जनता क...

एक और तस्वीर देखिये भारत के भविष्य की.

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एक और तस्वीर देखिये भारत के भविष्य की

बजट, यूनिक आई डी कार्ड, स्वात घाटी में शरिया क़ानून

बजट (लेखानुदान/अन्तरिम बजट) आ गया, हमेशा की तरह पक्ष-विपक्ष ने औपचारिकता निभा दी. पक्ष के लोगों ने अच्छा बताया तो विपक्ष ने आलोचना की. कई योजनाओं में धनराशि का आबंटन बढ़ा दिया गया है. सबसे बड़ी कठिनाई है भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार के मूल में भी भाई-भतीजावाद और राजनीति शामिल है. जमीनी स्तर की जितनी भी योजनायें हैं उनमें भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता जा रहा है. विकेन्द्रीकरण और पंचायतीराज व्यवस्था इसलिये लागू की गयी थी कि योजनाओं का इम्प्लीमेंटेशन जल्दी हो और पात्र व्यक्ति को लाभ पहुंचे लेकिन हुआ इसका उल्टा. विकेन्द्रीकरण के फलस्वरूप कमीशनखोरी और हिस्सेदारी बढ़ती गयी लिहाजा आम आदमी वहीं का वहीं रह गया जहां वह साठ साल पहले खड़ा था. किसी भी योजना का लाभ वास्तविक हकदार को तभी और सम्पूर्ण रूप में पहुंच पायेगा जब भ्रष्टाचार को समूल नष्ट कर दिया जाये और यह तभी सम्भव होगा जब सत्ता-शीर्ष पर बैठे लोग स्वयं अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करें, जिसकी सम्भावना अभी भी कम ही लगती है. राजनीतिक दलों की नीयत इससे ही स्पष्ट हो जाती है कि मन्त्री और उनके रिश्तेदारों की सम्पत्ति को सूचना कानून के दायरे से बाहर कर दिया गया है....

सीबीआई की विश्वसनीयता पर फिर प्रश्नचिन्ह

सीबीआई की विश्वसनीयता पर फिर प्रश्नचिन्ह। मुलायम का मामला हो या माया का या फिर अन्य दलों के राजनीतिक दलों के नेताओं के मामले हों , उच्चतम न्यायालय की लताड़ बताती है कि सीबीआई को राजनीतिक आकाओं के इशारे पर काम करना पड़ता है . निठारी कांड में फैसला हुआ , सीधे शामिल दोषियों को फांसी हुई , सीबीआई के खाते में सफलता जुड़ी़ , अच्छा लगा . एक अहम सवाल इससे जुड़ा हुआ यह है कि जिन सरकारी अधिकारियों और पुलिस के जिन अफसरों ने इन्हें बचाने की कोशिश की , उन्हें अभियुक्त क्यों नहीं बनाया गया ? पंधेर को लेकर इतनी उदार क्यों है सीबीआई ? लेकिन बोफोर्स के अभियुक्तों को निकलने का मौका किसने दिया और क्यों दिया ? सिखों का नरसंहार का मामला ही देखिये , गवाह कहता है मैं गवाही देने के लिये तैयार हूं , लेकिन सीबीआई को गवाह का ही पता नहीं चलता . चारा कांड में असली गुनहगार अभी तक क्यों बचे हैं . लखूभाई पाठक का मामला हो या पनडुब्बी , सेंट कीट्स हो स्टैम्प घोटाला , नेता क्यों ...