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धरती की पुकार को सुनें

मेरी आप सभी लोगों से यह प्रार्थना है कि धरती की पुकार को सुनें। धरती हमें क्या कुछ नहीं देती, खाने को अन्न, पीने के लिए जल, रहने के लिए स्थान, पहनने के लिए वस्त्र और भी न जाने क्या-क्या। लेकिन हम इस धरती को क्या देते हैं, प्रदूषण के सिवा। इस धरती को ओवर-क्राउडेड करने के अलावा और क्या योगदान रहा है हमारा? जंगल काटे जा रहे हैं खेत बनाने के लिए, खेतों की जगह सीमेंट की इमारतें खड़ी हो गयीं। नदी-तालाब सब बेमौत मारे जा रहे हैं। जल का अपव्यय हो रहा है, ग्लोबल वार्मिंग से पूरी दुनिया तबाही की तरफ भाग रही है, भारत में तो निश्चित रूप जल के लिए युद्ध होना निश्चित है। मेरी यही अपील है कि धरती पर से यह ओवर-लोडिंग कम कीजिए, और कम से कम पृथ्वी के लिए कुछ तो लौटाइये। देखिये किस तरह से बाँझ हो रही है धरती, कैसे जंगल के जंगल काटकर उसे नंगा किया जा रहा है। कैसे धरती का जल सोख कर उसे निर्जला किया जा रहा है। कैसे धरती की छाती पर सीमेंट की इमारतें बनायी जा रहीं हैं। कैसे धरती के सीने को फाड़कर बहुमूल्य खनिज पदार्थों का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है। कैसे अपने छोटे से लोभ के लिए धरती का चीर हरण किया जा रहा ...

मैंने कहीं पढ़ा था कि छोटी चीजें सुंदर होती हैं.

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देखिये एक छोटी सी चिड़िया और छोटा सा फूल। यह फूल एक जंगली घास का है जो हर घर में उग आती है।

दुबे जी और जितेन्द्र जी आपका नाम नहीं छूटा है

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दुबे जी और जितेन्द्र जी आपका नाम नहीं छूटा है, आप लोग तो पहले से ही ब्लॉग रोल में शामिल हैं। यह कुछ ऐसे नाम हैं, जिनके ब्लोग्स पर मैं जाता हूँ। लेकिन यह सम्पूर्ण सूची नहीं है। कुछ और नाम छूट गए हैं जिनसे मैं क्षमा प्रार्थी हूँ। अब आप एक छोटी सी चिड़िया को देखिये। मेरे पिताजी रोज इस डिब्बे में पानी रख देते हैं, और गौरैया , कौए, कबूतर आकर पानी पीते हैं। खाने की खोज में। कल इस चिड़िया के कुछ और फोटो अपलोड करूंगा।

नीचे वह लिस्ट है जिन ब्लॉग पर या जिनके ब्लॉग पर मैं अधिकतर जाता हूँ

नीचे वह लिस्ट है जिन ब्लॉग पर या जिनके ब्लॉग पर मैं अधिकतर जाता हूँ, हो सकता है कि इनमें कुछ महानुभावों के नाम छूट गए हों, जिनसे मैं क्षमा प्रार्थी हूँ। पढ़ने को तो बहुत होता है लेकिन समय कम होता है इसलिए कभी-कभी सभी जगह टिप्पणी करना सम्भव नहीं हो पाता जिसका कि मुझे हार्दिक खेद है। जो सहृदय व्यक्ति मेरे ब्लॉग पर आते हैं उनका तथा जो टिप्पणी कर मुझे बहुमूल्य राय देते हैं, उनका मैं हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ। कल के दिन पूरा आराम करूंगा अपने गाँव में मतदान करने के बाद। राज भाटिय़ा संगीता पुरी P।N। Subramanian आलोक सिंह Pt।डी.के.शर्मा"वत्स" hem pandey Udan Tashtari अल्पना वर्मा विनय ताऊ रामपुरिया परमजीत बाली Shastri संजय बेंगाणी कार्तिकेय धीरू सिंह इष्ट देव सांकृत्यायन अंशुमाली रस्तोगी दीपक कुमार भानरे Gagagn Sharmaदिनेशराय द्विवेदी आशीष कुमार 'अंशु' काजल कुमार डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक रंजन महेद्र मिश्रा Nirmla Kapila Hari Joshi bhawna shyam kori 'uday' अनिल कान्तArvind Mishra mamta लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` Zakir Ali 'Rajneesh' (S.B.A.I.) कुश S...

एक दरोगा की दादागिरी

बात कल दोपहर की है, दो बजे का समय रहा होगा जब सूर्य देव अपनी प्रचण्ड किरणों से धरती को तपा रहे थे। सड़क के किनारे एक पार्क है, जिसके चारों तरफ फुटपाथ है। इस फुटपाथ के किनारे पेड़ों की छाया रहती है जिसमें लोग खड़े हो जाते हैं और रिक्शे वाले भी सुस्ता लेते हैं। ऐसे ही कल एक रिक्शा खड़ा था जिस पर रिक्शे वाला बैठा हुआ था। पीछे से एक फोर्ड फिएस्टा आती है, जिसकी गति काफी तेज थी, लगा कि रिक्शे वाला गया। लेकिन पास आते-आते हल्की हुई, और फिर उसने पीछे से रिक्शे को ठोक दिया, रिक्शा आगे की ओर उछला, रिक्शे वाला नीचे। उसने पीछे देखा तो उसकी हिम्मत जवाब दे गयी और आस पास में खड़े बाकी लोगों की भी। क्योंकि इस नयी-नकोर कार के अन्दर एक तीन-सितारा धारी इन्स्पेक्टर मौजूद था, उतरने के बाद उसने रिक्शे वाले को घूरा, उसकी मां-बहन के साथ नाता जोड़ा। सड़क पर रिक्शा खड़े करने के आरोप में अन्दर कराने की धमकी दी। बाद में इत्मीनान से अपनी गाड़ी छाया में लगाई और जय हिन्द।

लालू और मुलायम की अभद्रता

लालू यादव और मुलायम सिंह यादव, एक राजद और दूसरा सपा का मुखिया, दोनों ही केन्द्रीय मन्त्री रह चुके हैं और इनसे अपेक्षा की जाती है कि यह लोग एक अनुशासित तथा जिम्मेदार व्यक्ति का आचरण करेंगे तथा अन्य सामान्य जनों को भी इनसे प्रेरणा मिलेगी। लेकिन इन लोगों ने जैसा व्यवहार पिछले दिनों मीडिया तथा चुनावकर्मियों के साथ किया उसे देखकर तो निराशा ही हुई। लालू यादव पत्रकारों को धकियाते दिखाई दिये तो मुलायम ने जसवन्तनगर में एक को थप्पड़ दिखाया और एक चुनाव कर्मी को धक्का दिया। क्या यह सब लोग नियम-कानूनों से ऊपर हैं, क्या एक आम आदमी लालू या मुलायम को धकियाये तो इन्हें बर्दाश्त होगा। क्या इनके ऊपर कोई चिल्लाये तो इनके समर्थक स्वीकार कर लेंगे। नहीं। फिर ऐसा क्यों है कि हमेशा आम ही चूसा जाता है? वह इसलिये कि आम बेवकूफ है जो इनकी असलियत जानकर भी अनजान बना रहता है या यों कहें कि जानना नहीं चाहता। यदि आम आदमी अब भी नहीं चेता तो आम की तरह चूसा ही जाता रहेगा, प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती.

बधाई हो, सादिक शेख बरी हो गया

बधाई हो, सादिक शेख बरी हो गया। कौन सादिक शेख, भूल गये! मैं याद दिलाता हूं, ११ जुलाई, मुम्बई, ट्रेन- कुछ याद आया। मुम्बई की लोकल ट्रेनों में हुये बम विस्फोटों को याद कीजिये जिसमें दो सौ से अधिक लोग मारे गये थे तथा ए०टी०एस० ने सादिक शेख को इन बम-विस्फोटों के लिये जिम्मेदार बताते हुये गिरफ्तार किया था तथा उस पर मुकदमा चलाया गया. यही सादिक शेख इन्डियन मुजाहिदीन का संस्थापक बताया जाता है. अब यह सिद्ध हो गया है कि ए०टी०एस० ने गलत आदमी को पकड़ा तो अब महाराष्ट्र सरकार का यह दायित्व बनता है कि ए०टी०एस० के सम्पूर्ण दल को (उप-निरीक्षक से लेकर मुखिया तक) सेवा से बर्खास्त किया जाये क्योंकि एक तो उन्होंने एक संभ्रान्त आदमी (जब क़ानून की नजर में निर्दोष है तो फिर संभ्रांत ही हुआ न) को पकड़ा, उसके लिये मानसिक वेदनायें दीं और उसकी जिन्दगी के कई वर्ष नर्क बना दिये, दूसरा उन्होंने दो सौ लोगों के हत्यारे को खुला छोड़ दिया. दूसरा अपराध तो पहले से भी अधिक गम्भीर है. देखना यह है कि अब सरकार क्या करती है???