उसका मिलना तो फकत एक बहाना ठहरा
तयशुदा था यूं मेरे चाक जिगर का होना
तयशुदा था यूं मेरे चाक जिगर का होना
बिजलियां तो चमक रही थीं बड़े अरसे से
नजर न आया उन्हें अब तलक मेरा होना
नजर न आया उन्हें अब तलक मेरा होना
आया वो इस तरह से मेरी महफिल में
मेरा होना न रहा न रहा उसका होना
मेरा होना न रहा न रहा उसका होना
निगाह मेरी अजी क्या गजब ये कर बैठी
दिल मेरा ठहरा मगर कब्जा उसका होना
दिल मेरा ठहरा मगर कब्जा उसका होना
सुना है खेलता नहीं वो अब खिलौनों से
जब से पाया है दिल का खिलौना होना
जब से पाया है दिल का खिलौना होना
मेरी आंखों में न झांको ऐ दोस्त मेरे
आदतन हो चुका है गीला इनका होना
आदतन हो चुका है गीला इनका होना
समा गया वो कुछ इस तरह मेरे अंदर
आईना देखूं मैं पर अक्स उसका होना
आईना देखूं मैं पर अक्स उसका होना
निगाह मेरी अजी क्या गजब ये कर बैठी
ReplyDeleteदिल मेरा ठहरा मगर कब्जा उसका होना
...
उम्दा शेर ...बहुत ही उम्दा रचना
बहुत सुंदर गजल जी
ReplyDeleteमेरी आंखों में न झांको ऐ दोस्त मेरे
ReplyDeleteआदतन हो चुका है गीला इनका होना
बहुत सुंदर ...
बहुत उम्दा रचना!
ReplyDeleteबहुत ही उम्दा सटीक रचना .... आभार
ReplyDeleteआपके ब्लॉग पर गजल पहली बार पढ़ रहा हूँ। हो सकता है आपने पहली भी गजलें लिखी होंगी, पर पढ़ नहीं पाया। अच्छी रचना है।
ReplyDeletebahut khoob
ReplyDeleteअच्छी लगी, मित्र यह गज़ल।
ReplyDeleteमेरी आंखों में न झांको ऐ दोस्त मेरे
ReplyDeleteआदतन हो चुका है गीला इनका होना
गज़ब की अभिव्यक्ति है।
इसमें कुछ कमियां लग रही हैं, उम्मीद है कि गुणीजन इसमें सुधार करने की और बताने की कृपा करेंगे.
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ReplyDeleteफकत एक बहाना ठहरा उसका मिलना
समाया है वो कुछ इस तरह मेरे अंदर
आईना मैं देखूं पर अक्स उसका होना
तयशुदा था यूं मेरे चाक जिगर का होना
आये वो इस तरह से मेरी महफिल में
कि नज़र न आया उन्हें मेरा वहाँ होना
बिजलियां तो चमक रही हैं इक अरसे से
दिल मेरा ठहरा धड़कनों का उसका होना
देखो खेलता नहीं अब वह खिलौनों से
पा जो लिया है दिलों का खिलौना होना
मेरी आंखों में न झांको ऐ दोस्त मेरे
आदत में हो चुका है गीला इनका होना
वाह डाक्टर साहब, आपने वाकई कमाल कर दिया...
ReplyDeleteमेरी आंखों में न झांको ऐ दोस्त मेरे
ReplyDeleteआदतन हो चुका है गीला इनका होना
बहुत सुंदर शेर...
बिजलियां तो चमक रही थीं बड़े अरसे से
ReplyDeleteनजर न आया उन्हें अब तलक मेरा होना
छाये छाये से लग रहे हैं ......
:))
मेरी आंखों में न झांको ऐ दोस्त मेरे
ReplyDeleteआदतन हो चुका है गीला इनका होना
सुंदर भाव
मार्मिक भाव सजाए है
ReplyDeleteमेरी आंखों में न झांको ऐ दोस्त मेरे
ReplyDeleteआदतन हो चुका है गीला इनका होना...
Hey !..Whats the matter ?????
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@Zeal - कोई मामला नहीं है. कुछ कुछ संज्ञाशून्य सा हो चुका है मन. बस कुछ भाव मन में आये और ऐसे ही तुकबन्दी कर ली.
ReplyDeleteगज़ब की अभिव्यक्ति है। धन्यवाद|
ReplyDeleteआईना देखूं मैं पर अक्स उसका होना
ReplyDeleteBest of all.... simply beauteous !!!
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ReplyDeleteGlad to know you are fine. Am feeling relieved after hearing from you.
Do not let your mind be 'Sangya shunya' . Just enjoy every moment of your life. It is precious.
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बदले बदले से सरकार नजर आते हैं:)
ReplyDeleteसुना है खेलता नहीं वो अब खिलौनों से
ReplyDeleteजब से पाया है दिल का खिलौना होना...
बहुत खूब ... आपका ये अंदाज़ भी लाजवाब है ... उम्दा शेर हैं ...
बहुत ही उम्दा गजल...गहरे एहसास के साथ बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति
ReplyDeleteमेरी आंखों में न झांको ऐ दोस्त मेरे
ReplyDeleteआदतन हो चुका है गीला इनका होना
बहुत खूबसूरत गज़ल
आया वो इस तरह से मेरी महफिल में
ReplyDeleteमेरा होना न रहा न रहा उसका होना...
बहुत खूब! बहुत सुन्दर गज़ल..
अब क्या कहू.......बहुत ही सुन्दर, बड़ा सकूँ मिला, सच में .....आभार.
ReplyDelete_________
Sir, as per your valuable comment I review my blogs settings and try to remove unwanted "frogs" completely. I really thankful for your comments. Sir, please visit my blog again and please tell me the situation. In this case my blog resisted to stream and I am unable to see directly the errors.
Thanks, again for your valuable comments.
I really enjoyed the filled emotions in this Gajal
Regards.
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वाह किये बिना रहा न गया!
ReplyDeleteभई ज़रा संभलकर!
ReplyDeleteबंधू आपको एक बात बतानी हे की आप ने जो ये Indian Citizen लिखा हे इसको हटा दें क्योंकि हम सिर्फ और सिर्फ भारतीय हें Indian Citizen अंग्रेजों की कंपनी का नाम था हम लोग आज भी अपनी गुलामी की निशानियों को लेकर जी रहे हें Indian Citizen किर्पया इसे हटा दें और जादा से जादा भारत नाम का उपयोग करें जेय हिंद
ReplyDeleteसुना है खेलता नहीं वो अब खिलौनों से
ReplyDeleteजब से पाया है दिल का खिलौना होना...
.... लाजवाब अंदाज़...गज़ब की अभिव्यक्ति है
कुछ व्यक्तिगत कारणों से पिछले 15 दिनों से ब्लॉग से दूर था
ReplyDeleteनिगाह मेरी अजी क्या गजब ये कर बैठी
ReplyDeleteदिल मेरा ठहरा मगर कब्जा उसका होना
kya baat hai!!!!
bahut khoobsoorat gazal...
This comment has been removed by the author.
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