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क्या प्रभात शुंगलू जी ने मकबूल फिदा हुसैन द्वारा बनाये गये चित्र देखे भी हैं?

जी नहीं. उनके ब्लाग का एक लेख जो शब्दश: नीचे दिया जा रहा है, गौर फरमायें. प्रभात जी का मूल लेख इस साइट पर छपा है. . "हुसैन, तुम माफी मत मांगना मकबूल फ़िदा हुसैन को कतर की नागरिकता दिये जाने पर एक बार फिर से उन्हें खोने का ऐहसास हो रहा। लेकिन राजनीति की बिसात पर हुसैन बस मोहरा बन कर रह जाते हैं। आज सेक्युलरिज़म की दुहाई देने वाले चुप हैं। ये वही लोग हैं जिन्होने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को सरकारी दस्तावेजों के विशाल डम्पिंग ग्राउंड में दफन कर दिया है । ये हिम्मत कौन दिखाएगा कि उस रिपोर्ट को बाहर निकाल कर, उसे झाड़ पोंछ कर उसपर सिरे से अमल किया जाए। हुसैन से अलग जस्टिस सच्चर ने जो देश की अक़लियत के विकास का एक्स-रे निकाला उसमें देश की सेक्युलर छवि तार-तार दिखी। सेक्युलरवाद की दुहाई देने वाला ये समाज अक्सर कट्टरवादी हो-हल्ला करने वालों के सामने घुटने टेकता देखा गया। सरकारी तंत्र भी नपुंसक बन जाता है। यदि ऐसा न होता तो हुसैन को दुबई जाकर न बसना पड़ता। महाराष्ट्र के पंढरपुर की धरती पर वो दोबारा लौटते जहां उन्होंने जन्म लिया था। लेकिन महाराष्ट्र की धरती को तो मातोश्री विचारधारा वाले बिगड़...

हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान यहां देखिये.........

इस लिंक पर जाइये http://bharhaas.blogspot.com/2010/01/blog-post_7783.htmlऔर देखिये कि किस तरह मकबूल फिदा हुसैन ने अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के नाम पर हिन्दू देवी देवताओं का अपमान किया है. इस सबके खिलाफ मुस्लिम धर्मगुरू आगे क्यों नहीं आते और क्यों मुस्लिम संगठन इस सबको चुपचाप देखते रहते हैं. क्यों धर्मनिरपेक्षी इस पर आंख मूंद लेते हैं.मेरी इच्छा नहीं थी कि इसे प्रचारित करूं लेकिन इस तरह की गलीज हरकत का सबके सामने आना ही उचित है, क्योंकि रेत में सर छुपाने से तूफान खत्म नहीं हो जाता......... अब भी समय है जागने का............. साभार:- भड़ास और काव्यमंजूषा जहां से मैंने यह पढ़ा ........

रिलायन्स और बीएसएनएल द्वारा अपने उपभोक्ता को किया गया परेशान

पिछली पोस्ट में मैंने एअरटेल के कस्टमर केयर के बारे में लिखा था. अब आपको बताता हूं रिलायन्स और बीएनएनएल के बारे में. दिसम्बर के अंत में मैंने अपने रिलायन्स प्रीपेड में संदेश वाला एक कूपन डलवाया. उद्देश्य था कि बीएसएनएल जब काम न करे तो बात करने और संदेशे भेजने के लिये रिलायन्स का कनेक्शन काम आयेगा. काफी कुछ सुन रखा था रिलायन्स के बारे में. हमने भी उन्तीस तारीख से धड़ाधड़ संदेश भेजना प्रारम्भ किया जिसमें कुछ काफी महत्वपूर्ण थे. मोबाइल फोन की संदेश सेवा में डिलीवरी रिपोर्ट आफ कर दी थी, क्योंकि संदेश डिलीवर होने के बाद जब उसका पुष्टिकरण आता तो थोड़ी झुंझलाहट होती. अब हुआ यह कि पन्द्रह जनवरी तक हम इस मुगालते में कि सारे संदेश पहुंच गये होंगे. भला हो हमारे मित्र का, जिन्होंने हमें यह बताया कि मेरा संदेश उन तक नहीं पहुंचा. फिर एक अन्य सज्जन ने भी चेक किया तो पाया कि उनके संदेश भी डिलीवर नहीं हुए थे. यह दिक्कत बीएसएनएल पर भेजने वाले संदेशों को लेकर थी. अब इस डिलीवरी की पीड़ा से भन्नाकर जब हमने काल सेंटर बात करने की कोशिश की तो लगभग पन्द्रह मिनट बाद एक पुरुष स्वर सुनाई पड़ा. अपनी समस्या के बारे में ...

कस्टमर केयर पर बात करने के लग रहे हैं पैसे - पेश है एक सुपर माइक्रो पोस्ट.

विश्वास नहीं होता, मुझे भी नहीं हुआ था. आखिर कस्टमर केयर क्यों बनाया जाता है, इसलिये कि कस्टमर को कोई समस्या हो तो केयर पर बात कर समस्या का निदान करा सके या शिकायत दर्ज करा दे या फिर कोई सुझाव इत्यादि दे सके. अभी पिछले दिनों जब मैंने एक कठिनाई के सिलसिले में एअरटेल के कस्टमर केयर से इंटरनेट सेटिंग्स के बारे में बात करना चाहा तो एक कनकलता, गजगामिनी टाइप महिला की आवाज आई "ध्यान दें कि उपभोक्ता से इस नम्बर पर काल करने के लिये प्रति तीन मिनट पचास पैसे चार्ज किये जायेंगे". पहले मुझे लगा कि शायद मैंने कोई और नम्बर मिला दिया है या फिर शायद कोई वैल्यू एडेड योजना पर चला गया हूं, इसलिये फिर दोबारा और फिर तिबारा नम्बर डायल किया. लेकिन मैं गलत था, वास्तव में कस्टमर केयर पर पचास पैसे चार्ज किये जा रहे थे. कितना अच्छा किया कम्पनी ने. एक पंथ और तीन काज. पहला कि लोग काल कम करेंगे इसलिये उन्हें काल सेंटर पर कम लोग रखना पड़ेंगे. दूसरा काल करेंगे तो पैसे सीधे होंगे. तीसरा शिकायतें अपने आप कम हो जायेंगी. और मेरे एक मित्र के अनुसार भारत में तो वैसे भी कस्टमर का अर्थ होता है वह व्यक्ति जो कष्ट से म...

पुणे बम-ब्लास्ट के सिलसिले में एक तथ्यपरक रिपोर्ट.

हिन्दुस्तान के बीस फरवरी के अंक में श्री पंकज चतुर्वेदी का एक लेख छपा है जिसके कुछ हिस्से यहां दिये जा रहे हैं. पूरा लेख आप हिन्दुस्तान में पढ़ सकते हैं. यह एक बहुत ही रोचक तथा तथ्यों से परिपूर्ण लेख है, लेख को पढ़ने से आपको ऐसे तथ्य पढ़ने को मिलेंगे जो अभी तक सामने नहीं आ सके हैं. "मीडिया ने जल्दबाजी में हादसे के कारणों की तह में गये बगैर किसी वर्ग या देश विशेष को इसके लिये जिम्मेदार मान लिया जाये. यह भी नहीं पता चल सका है कि धमाके में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक कौन सा था. यह तय नहीं हो पाया था कि धमाके में आरडीएक़ का इस्तेमाल किया गया कि अमोनियम नाइट्रेट का, लेकिन यह स्थापित करने का प्रयास होता रहा कि धमाका करने वालों का प्रशिक्षण पाकिस्तान में हुआ था. यह भुला दिया गया कि एक कर्नल ने सेना के जब्ती वाले भंडार से आरडीएक्स चुराया था. मालेगांव, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और अजमेर शरीफ दरगाह में हुए धमाकों में भी इसी तरह की तकनीक थी." "दो साल पहले ही कानपुर में एक घर में बम फटने से दो युवकों की मौत के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि मृतक बजरंग दल से जुड़े थे. फिर जर्मन बेकरी में धमाके ...

बद अच्छा, बदनाम बुरा

पूर्वोत्तर में ईसा मसीह के एक विवादित चित्र को लेकर देश भर में बवाल प्रारम्भ हो गया. कल मजीठा में उपद्रव हुआ. उपद्रवियों ने जमकर तोड़-फोड़ की और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया. मजीठा, मोगा इत्यादि पंजाब के कई शहरों में काफी बवाल हो चुका है. सिख भी अपनी धार्मिक भावनाओं को लेकर बिल्कुल समझौता नहीं करते, जिसका प्रमाण बाबा राम रहीम द्वारा गुरु गोविन्द सिंह साहब जैसी वेश-भूषा धारण करने पर हुआ दंगा-फसाद है. रामगढियों को लेकर भी बवाल हो चुका है, और आजकल दर्शन सिंह को लेकर है.  इससे पहले डेनिश कार्टूनिस्ट द्वारा बनाये गये मोहम्मद साहब के विवादास्पद चित्र को लेकर पूरे देश में आगजनी और तोड़फोड़ की गयी. पिछले दिनों मुहर्रम के दौरान उत्तर प्रदेश में दंगे और तोड़-फोड़ की कुछ घटनायें हुई :- १-आगरा में उपद्रव हुआ. २-मथुरा में शिया-सुन्नी भिड़े. ३-मैनपुरी में ताजिया दफनाने को लेकर शमशान की मिट्टी हटाने को लेकर पथराव की नौबत. ४-अलीगढ़ में एक बस के सामने आने पर बवाल, ताजियादार बड़ी मुश्किल से माने. ५-बहजोई, मुरादाबाद में नये रास्ते से ताजिये ले जाने की जिद, फिर पथराव...

अस्सी वर्षीय वृद्ध ने रचाई चौथी शादी और अब इकतीसवें बच्चे का इच्छुक

नीचे एक खबर ज्यों की त्यों दी जा रही है,. कृपया इसे पढ़ें. आभार :- आईबीएन खबर. असम के हुसैन अली भले ही 80 साल के हो गए हों लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर भी वह पूरी तरह सेहतमंद हैं। पेशे से किसान अली के पहले ही 30 बच्चे हैं और अब वह 31वें बच्चे के पिता बनने जा रहे हैं। अली की चार पत्नियां हैं और उनकी तीसरी पत्नी मां बनने वाली हैं। वह अपने इस विशाल परिवार से बेहद खुश हैं। अली कहते हैं, "यह सब खुदा का तोहफा है और मैं हमेशा भरा-पूरा परिवार चाहता था। " गुवाहाटी से 370 किलोमीटर पूर्व में स्थित लखीमपुर जिले के मोहखाली के रहने वाले अली कहते हैं, "किसी के बारे में उसकी लंबाई या वजन देखकर ही धारणा मत बनाइए। मैं दिल से अब भी जवान हूं, हालांकि अब मैं किसी और से शादी करने नहीं जा रहा हूं लेकिन 31वें बच्चे का बाप बनने की उम्मीद मुझे खुश करती है। " यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें अपने सभी बच्चों के नाम याद हैं? अली थोड़ा गुस्सा होकर अपने बच्चों के नाम गिनाना शुरू करते हैं लेकिन 15 बच्चों के नाम गिनाने के बाद वह भूल जाते हैं। अली कहते हैं कि इस समय भले ही वह नाम भूल गए हों, लेकिन चेहरा द...